रायपुर। स्वाभिमान पार्टी (Swabhiman Party) की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक रायपुर में शुरू हो गई है। बैरन बाजार स्थित आशीर्वाद भवन में आयोजित बैठक में पार्टी की आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक दिशा पर मंथन किया जा रहा है। बैठक का समापन 20 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष बल्देवराज सूद के संबोधन के साथ होगा।
राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक से पहले 18 सितंबर को पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक आयोजित की गई थी। इसके बाद अब राष्ट्रीय कार्यसमिति में देश की मौजूदा सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों, आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों और आगामी चुनावों की तैयारियों पर चर्चा हो रही है।
पार्टी ने आने वाले समय में विभिन्न राज्यों की चुनावी राजनीति में सक्रिय रूप से उतरने की तैयारी की है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि वह देश में कांग्रेस, भाजपा, सपा, टीएमसी और बसपा जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच खुद को एक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास करेगी।
हालांकि, पार्टी का चुनावी विस्तार और प्रभाव किस स्तर तक पहुंचेगा, यह आगामी चुनावों में उसके संगठन और प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
तीन प्रमुख आधारों पर काम करने का दावा
स्वाभिमान पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे ने पार्टी की विचारधारा और प्राथमिकताओं को तीन प्रमुख आधारों से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि पार्टी मानव केंद्रित विकास की जगह प्रकृति केंद्रित विकास, मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव और भारत की परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने के मुद्दे पर काम कर रही है।
वीरेंद्र पांडे के मुताबिक, पार्टी का मानना है कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था में मूलभूत बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचे की जड़ें अंग्रेजों के समय की व्यवस्था में हैं और केवल आईसीएस का नाम बदलकर आईएएस करने से व्यवस्था की कार्यप्रणाली में मूलभूत बदलाव नहीं आया।
स्वाभिमान पार्टी के नेतृत्व के मुताबिक, पार्टी के कई संस्थापक और वर्तमान पदाधिकारी पहले भाजपा और आरएसएस से जुड़े रहे हैं। पार्टी का गठन 2013 में हुआ था।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बल्देवराज सूद ने कहा कि पार्टी भारत की राजनीति में एक विकल्प बनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत की बात कही।
‘विष मुक्त भोजन’ को बनाया प्रमुख मुद्दा
पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील राव शिंदे ने कहा कि पार्टी को देश में राजनीतिक शून्य महसूस हो रहा है और बदलाव की जरूरत है। उन्होंने पार्टी के प्रमुख अभियान को ‘विष मुक्त भोजन’ से जोड़ा।
उनके मुताबिक इसके लिए पार्टी विष मुक्त खेती, गो आधारित कृषि और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में काम करेगी।
बैठक में तय किया है कि पार्टी जल, जंगल, जमीन, जन और जानवर को अपने काम का आधार बनाकर आगे बढ़ना चाहती है। पार्टी का कहना है कि उसका जोर प्रकृति केंद्रित विकास और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाने पर रहेगा।
राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय पदाधिकारी शामिल हुए हैं। मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर मणिशंकर डोंगरे और उत्तर प्रदेश के नेता सौरभ भाटी ने भी बैठक में अपनी बात रखी।
प्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक अनुभवों को बैठक में साझा किया जा रहा है।
बैठक में संगठन के विस्तार, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के आकलन और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा के साथ कई प्रस्ताव पारित किए जाने की संभावना है।
बैठक का संचालन पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील शिंदे, इंदौर कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष पूरन छाबरिया ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक संगठन के विस्तार और आगामी कार्ययोजना तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।











