रायपुर। झीरम घाटी हत्याकांड (Jhiram Valley massacre) के 13 साल पुराने मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल समेत कई नेताओं और अन्य लोगों की मौत हुई थी।
अदालत के फैसले के बाद जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा ने इसे न्याय की जीत और ऐतिहासिक फैसला बताया है, वहीं कांग्रेस ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए जांच को अधूरा बताया है।
फैसले के बाद सबसे तीखी प्रतिक्रिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की ओर से आई है। दोनों नेताओं ने सवाल उठाया है कि अदालत ने जिन 10 लोगों को सजा दी है, क्या वे ही झीरम हमले के पूरे षड्यंत्र और उसके क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार थे।
भूपेश बघेल बोले- यह अधूरा न्याय, मुख्य साजिशकर्ता अब भी बाहर
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 10 दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने के बाद इसे ‘अधूरा न्याय’ बताया। उनका आरोप है कि अदालत के सामने जिन लोगों का मामला पहुंचा, उन्हें सजा मिल गई, लेकिन झीरम नरसंहार के पीछे की कथित बड़ी साजिश की जांच पूरी नहीं हुई।
बघेल के मुताबिक, जिन लोगों को सजा दी गई है, वे कथित तौर पर नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल लोग नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ माओवादी नेताओं के नाम शुरुआती जांच में सामने आए थे, लेकिन बाद में उन्हें मामले से हटा दिया गया और उनके खिलाफ आरोप तय नहीं हुए।
बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि NIA और जांच आयोग ने साजिश के एंगल की पर्याप्त जांच नहीं की और भाजपा नेताओं की ओर से भी जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस का रुख बदलने वाला नहीं है, क्योंकि उनके मुताबिक जांच अधूरी है, इसलिए न्याय भी अधूरा है।
बघेल ने अपने पुराने आरोप को भी दोहराया कि झीरम मामले में उनके पास महत्वपूर्ण जानकारी थी और कांग्रेस सरकार ने इसकी अलग जांच के लिए SIT गठित की थी। उनका कहना है कि उस जांच को आगे बढ़ाने की कोशिशों का विरोध किया गया।
दीपक बैज का सवाल- क्या 10 लोग इतनी बड़ी साजिश रच सकते थे?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने अदालत के फैसले को स्वीकार करते हुए जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बैज का दावा है कि झीरम हमला केवल एक सामान्य नक्सली हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़ी राजनीतिक साजिश थी। उन्होंने इसे राजनीतिक षड्यंत्र और ‘सुपारी किलिंग’ तक बताया है। हालांकि ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें अदालत के फैसले ने स्थापित तथ्य के रूप में घोषित नहीं किया है।
बैज का सबसे बड़ा सवाल दोषी ठहराए गए 10 लोगों की भूमिका को लेकर है।
उनका कहना है कि इतने बड़े हमले की योजना और उसे अंजाम देने के लिए वरिष्ठ माओवादी कमांडरों की भूमिका की जांच जरूरी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जिन 10 लोगों को दोषी ठहराया गया है, वे अकेले इतने बड़े हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में सक्षम थे?
बैज ने यह भी कहा कि जांच में करीब 200 माओवादियों के हमले में शामिल होने की बात सामने आई थी और 39 लोगों को नामजद किया गया था, फिर सजा केवल 10 लोगों को ही क्यों हुई।
उन्होंने वरिष्ठ माओवादी नेताओं के नाम कथित तौर पर चार्जशीट से हटाए जाने और बाद में आत्मसमर्पण करने वाले उन लोगों से पूछताछ नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए, जिनकी भूमिका को लेकर कांग्रेस संदेह जताती रही है।
बैज ने यह भी सवाल उठाया कि हमले से पहले खतरे के संकेत और नक्सलियों की चेतावनियों के बावजूद कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी गई। उनका आरोप है कि इस पहलू की भी पर्याप्त जांच नहीं हुई।
कांग्रेस का सवाल- अदालत का फैसला अपनी जगह, लेकिन साजिश की जांच कहां है?
कांग्रेस की प्रतिक्रियाओं का मूल तर्क यही है कि दोषियों को सजा मिलना और झीरम की पूरी साजिश का सामने आना दो अलग बातें हैं।
पार्टी का कहना है कि अदालत ने जिन आरोपियों के खिलाफ अभियोजन ने साक्ष्य पेश किए और जिनके खिलाफ दोष सिद्ध हुआ, उन्हें सजा दी है। लेकिन कांग्रेस उन लोगों और परिस्थितियों की जांच की मांग कर रही है, जिन्हें वह हमले के कथित बड़े षड्यंत्र से जोड़ती रही है।
यानी कांग्रेस का दावा है कि ‘किसने हमला किया’ के साथ-साथ ‘हमले की योजना किसने बनाई’ और ‘किसके निर्देश पर पूरी कार्रवाई हुई’, इन सवालों का जवाब भी सामने आना चाहिए।
मुख्यमंत्री साय बोले- न्याय की जीत
वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘न्याय की जीत’ बताया।
उन्होंने झीरम घाटी हत्याकांड को छत्तीसगढ़ के इतिहास का बेहद पीड़ादायक अध्याय बताया और कहा कि इस घटना में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों ने जान गंवाई।
मुख्यमंत्री ने 10 दोषी माओवादियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को न्याय की जीत बताते हुए NIA की जांच की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि एजेंसी ने जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया है।
साय ने अपने बयान में माओवादी हिंसा, लोकतंत्र और संविधान का भी जिक्र किया और कहा कि बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने झीरम में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी।
विजय शर्मा का पलटवार- भूपेश के पास सबूत थे तो सामने क्यों नहीं रखे?
उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया।
उन्होंने कहा कि NIA की जांच के आधार पर लंबे समय तक सुनवाई चली और अदालत ने साक्ष्यों की जांच के बाद फैसला दिया है। शर्मा ने NIA की जांच को गंभीर और मेहनत से की गई जांच बताया।
भूपेश बघेल के आरोपों पर शर्मा ने सवाल किया कि जब वे मुख्यमंत्री थे और झीरम मामले से जुड़े सबूत होने की बात कहते थे, तो उन्होंने उन सबूतों को सामने क्यों नहीं रखा।
उनका कहना था कि अगर अब भी किसी के पास कोई साक्ष्य है तो उसे सार्वजनिक मंचों पर आरोप लगाने के बजाय NIA या अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए।
विजय शर्मा ने कांग्रेस पर झीरम मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप भी लगाया।
अरुण साव बोले- अदालत में साक्ष्य और गवाहों के आधार पर फैसला
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अदालत में बड़ी संख्या में साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उनके मुताबिक NIA की चार्जशीट, गवाहों के बयान और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया है।
कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर अरुण साव ने कहा कि यदि किसी के पास मामले से संबंधित कोई अतिरिक्त साक्ष्य है तो उसे अदालत के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा करने के बजाय अपनी अपेक्षा के मुताबिक फैसला चाहने का आरोप लगाया।











