लेंस डेस्क। मध्य प्रदेश के बालाघाट (Balaghat)जिले में पिछले कुछ महीनों में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है। इन मौतों का मुख्य कारण बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बताया जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है कि मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।”
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को संबोधित करते हुए कहा कि दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो राज्य की जमीनी हालत भी देखें। राहुल ने आरोप लगाया कि बीमारी, पोषण की कमी, साफ पानी की अनुपलब्धता और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था नन्हें बच्चों की जान ले रही है। उन्होंने मिलावटी दवाइयों और जहरीली अवैध शराब का भी जिक्र किया, जो सैकड़ों परिवारों को तबाह कर रही है।
क्या है बालाघाट का मामला?
बालाघाट के बिरसा और बैहर ब्लॉक के दूरदराज के आदिवासी गांवों में ज्यादातर बैगा और गोंड समुदाय के बच्चे प्रभावित हुए हैं। जून से शुरू हुई मौतों का सिलसिला जारी रहा। सरकारी आंकड़ों में शुरू में 8 मौतें बताई गईं, लेकिन स्थानीय लोगों, मीडिया और विपक्ष के अनुसार संख्या 30 से ज्यादा पहुंच गई है।
जांच में खसरा, मलेरिया, दोनों का मिश्रित संक्रमण, सांस की तकलीफ, उल्टी-दस्त और कुपोषण मुख्य कारण सामने आए हैं। केंद्र सरकार की टीम की स्क्रीनिंग में हजारों बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए। कई गांवों में पोषण आहार लंबे समय से बंद रहने की शिकायत भी मिली थी। स्वास्थ्य सुविधाएं दूर होने और समय पर इलाज न मिलने से स्थिति और बिगड़ी।
राहुल गांधी का बड़ा आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि वे इंदौर आ रहे हैं और प्रदेश के छात्रों, युवाओं व आम लोगों से फीडबैक ले रहे हैं। उनके अनुसार सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था देश में सबसे ज्यादा बर्बाद है। उन्होंने दावा किया कि छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और महिलाएं- हर वर्ग प्रताड़ित है। राहुल ने मध्य प्रदेश सरकार को देश की सबसे भ्रष्ट और कुशासित सरकार करार दिया।
बालाघाट मामले में प्रशासन ने स्वास्थ्य सर्वे, वैक्सीनेशन अभियान और मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात किए हैं। जिला अस्पताल में बेड बढ़ाने और पोषण पुनर्वास केंद्रों में बच्चों को भर्ती करने का काम भी चल रहा है। लेकिन विपक्ष और स्थानीय लोग सरकार पर देर से कार्रवाई और लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।












