मंडी बोर्ड के एमडी के खिलाफ कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

लेंस डेस्क । छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड में संविदा पर नियुक्त प्रबंध संचालक महेंद्र सिंह सवन्नी के खिलाफ कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारी संगठनों ने उनके खिलाफ सामूहिक हस्ताक्षर अभियान चलाया है और थाने में शिकायत दर्ज कराई है। करीब 245 कर्मचारियों ने हस्ताक्षर किए हैं।

कर्मचारियों के आरोप

नवा रायपुर स्थित मंडी बोर्ड मुख्यालय के कर्मचारियों का आरोप है कि सवन्नी कर्मचारी विरोधी रवैया अपना रहे हैं। वे दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकाते हैं तथा स्थानांतरण की धमकी देते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कार्यप्रणाली में तानाशाही का माहौल बन गया है। कई कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने मंडी बोर्ड सचिव डॉ. मालिकराम पोते को लिखित शिकायत सौंपी है और पुलिस थाने में भी मामला दर्ज कराया है।

मंडी इंस्पेक्टर से एमडी तक का सफर

महेंद्र सिंह सवन्नी की शुरुआत मंडी बोर्ड में सचिव वर्ग के पद से हुई थी। मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड भोपाल से उनकी पहली नियुक्ति 1985-86 में हुई। बाद में उन्हें विभिन्न मंडी समितियों भटगांव, आरंग, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा, भटापारा, तिल्दा, रायपुर आदि में पदस्थापना मिली। समय के साथ वे सचिव वरिष्ठ, उपसंचालक और संयुक्त संचालक के पद पर पहुंचे। 06/06/2011 को मंडी बोर्ड मुख्यालय में संयुक्त संचालक के रूप में पदस्थ हुए। बाद में अतिरिक्त प्रबंध संचालक बने।

30 जून 2024 को वे अतिरिक्त प्रबंध संचालक पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके तुरंत बाद छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हें प्रबंध संचालक के पद पर संविदा नियुक्ति दे दी। कर्मचारियों का आरोप है कि 16 वर्षों में उनके पद में कई बड़े बदलाव हुए, लेकिन उच्च स्तर से जांच नहीं कराई गई।
कर्मचारियों की मांग

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सवन्नी को 15 दिनों के अंदर प्रबंध संचालक पद से हटाया जाए। उन्होंने मांग की है कि यह पद आईएएस, आईएफएस या आईआरएस स्तर के अधिकारी को दिया जाए। अगर मांग नहीं मानी गई तो वे और आंदोलन करेंगे। हस्ताक्षर अभियान में विभिन्न मंडी समितियों और कार्यालयों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया है।

सवन्नी को पहले भी मंडी बोर्ड का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। बाद में उन्हें पूर्णकालिक प्रबंध संचालक नियुक्त किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि संविदा नियुक्ति की अवधि बढ़ाई जाती रही, जिससे असंतोष बढ़ा उन्हें 3 बार संविदा एमडी नियुक्त किया जा चुका है।

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