रायपुर। जिला अस्पताल रायपुर में कार्यरत DNB रेजिडेंट डॉक्टर करीब सात महीने से स्टाइपेंड नहीं मिलने के विरोध में हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों ने 3 सितंबर से हड़ताल शुरू की है। उनका कहना है कि ज्वाइनिंग के बाद से अब तक स्टाइपेंड का भुगतान नहीं किया गया है। लगातार मांग और अधिकारियों से चर्चा के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर डॉक्टरों ने यह कदम उठाया है।
ओपीडी से इमरजेंसी तक दे रहे सेवाएं
DNB रेजिडेंट्स का कहना है कि वे अस्पताल में ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी, रात की ड्यूटी और मरीजों की देखभाल जैसी नियमित चिकित्सकीय सेवाओं में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद करीब सात महीने से उन्हें स्टाइपेंड नहीं मिला है। लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण डॉक्टरों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी और आवेदन भी दिए। इसके बावजूद भुगतान को लेकर अब तक कोई स्पष्ट समाधान या समयसीमा नहीं बताई गई है।
क्या हैं डॉक्टरों की प्रमुख मांगें?
हड़ताल कर रहे DNB रेजिडेंट्स ने लंबित स्टाइपेंड का पूरा भुगतान तत्काल करने की मांग की है। इसके अलावा वे चाहते हैं कि भविष्य में स्टाइपेंड का भुगतान नियमित और समय पर किया जाए।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में लंबित स्टाइपेंड के भुगतान की स्पष्ट समयसीमा तय करना और भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए संबंधित विभाग की ओर से उचित व्यवस्था करना भी शामिल है।
NBEMS और स्वास्थ्य विभाग से हस्तक्षेप की अपील
DNB रेजिडेंट्स ने NBEMS और छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जल्द समाधान की अपील की है। उनका कहना है कि करीब सात महीने तक स्टाइपेंड नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
JDA रायपुर के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टर किसी तरह की विशेष सुविधा या एहसान नहीं मांग रहे हैं। उनकी मांग है कि मरीजों की सेवा के बदले मिलने वाला उनका वैध स्टाइपेंड जल्द जारी किया जाए।










