रायपुर। छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व (Indravati Tiger Reserve) में तीन बाघों की हत्या और उनकी खाल की तस्करी के मामले ने वन विभाग को भी चिंता में डाल दिया है। जांच में अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के संकेत मिलने के बाद वन मंत्री केदार कश्यप ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की सिफारिश की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 27 जुलाई को राज्य के गृह विभाग को पत्र भेजकर CBI जांच के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
विभाग के मुताबिक, अब तक तीन बाघों की खाल बरामद की जा चुकी हैं और मामले में कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच का दायरा छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा तक पहुंच चुका है। विभाग ने यह भी आशंका जताई है कि तस्करी का नेटवर्क दूसरे राज्यों तक फैला हो सकता है और आगे अन्य स्थानों पर भी गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।
मामले की शुरुआत 29 जून को हुई, जब वन विभाग को सूचना मिली कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से दो लोग छत्तीसगढ़ की ओर बाघ की खाल लेकर आ रहे हैं। संयुक्त एंटी-पोचिंग टीम ने बांदे-पखांजूर मार्ग पर देर रात दोनों को पकड़ा।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गढ़चिरौली जिले के अहेरी निवासी बिजेश्वर गेडाम और गढ़हेरी निवासी बाबूराव मडावी के रूप में हुई। इनके पास से दो बाघों की खाल, 13 बाघ की मूंछें, एक महाराष्ट्र नंबर की बाइक और अन्य सामान बरामद किया गया।
जांच में सामने आया कि बिजेश्वर गेडाम गढ़चिरौली पुलिस की स्पेशल ब्रांच के इंटेलिजेंस सेल से जुड़ा पुलिस कांस्टेबल था, जबकि बाबूराव मडावी गढ़चिरौली पुलिस से कथित तौर पर मुखबिर के रूप में जुड़ा था। दोनों को 30 जून को भानुप्रतापपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
इंद्रावती के जंगलों में पहुंची जांच
पूछताछ के बाद जांच टीम छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से लगे इंद्रावती क्षेत्र तक पहुंची। नेतिवाड़ा गांव में संदिग्धों के घरों की तलाशी ली गई। यहां से शिकार के जाल, चाकू, 12 पंजे और चार कैनाइन दांत समेत कई सामान बरामद किए गए।
इसके बाद 5 जुलाई को इंद्रावती नदी के पास एक और बाघ की खाल बरामद हुई। इसके बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व में एक और वन अपराध दर्ज किया गया। इस मामले में सात और लोगों को गिरफ्तार किया गया और 6 जुलाई को उन्हें बीजापुर कोर्ट में पेश किया गया। इस तरह गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या नौ हो गई।
सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, गिरफ्तार नौ आरोपियों में चार महाराष्ट्र और पांच बीजापुर जिले के रहने वाले हैं।
करीब 400 किलोमीटर के वन्यजीव कॉरिडोर पर तस्करों की नजर?
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इंद्रावती और उससे लगे अबूझमाड़-गढ़चिरौली के जंगल मध्य भारत के एक बड़े और अपेक्षाकृत जुड़े हुए वन क्षेत्र का हिस्सा हैं। यह इलाका महाराष्ट्र, दक्षिणी छत्तीसगढ़ और आगे ओडिशा के जंगलों से जुड़ा हुआ है।
जांच में सामने आया नेटवर्क गढ़चिरौली, इंद्रावती, अबूझमाड़, उदंती-सीतानदी और ओडिशा के सुनाबेड़ा क्षेत्र को जोड़ने वाले करीब 400 किलोमीटर लंबे वन्यजीव कॉरिडोर तक फैला होने की आशंका जताई जा रही है।
वन विभाग का मानना है कि इंद्रावती नदी और आसपास का दुर्गम जंगल वन्यजीवों की राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
CBI जांच की जरूरत क्यों पड़ी?
मामले में तीन बाघों की खाल की बरामदगी, नौ गिरफ्तारियां और दो राज्यों में फैले नेटवर्क के संकेत मिलने के बाद वन विभाग ने इसे सामान्य वन अपराध से कहीं अधिक गंभीर माना है। विभाग ने संभावित अंतरराज्यीय और राष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की जरूरत बताई है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने मामले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए CBI जांच के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब राज्य गृह विभाग के स्तर से CBI जांच के लिए आगे की कार्रवाई की जानी है।









