नई दिल्ली। एनटीए(NTA) द्वारा तीन विषयों की यूजीसी-नेट परीक्षा दोबारा कराने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि बार-बार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है और इसकी सीधी जवाबदेही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है।
कांग्रेस ने एनटीए द्वारा रद्द या स्थगित की गई प्रमुख परीक्षाओं पर श्वेत पत्र जारी करने, एजेंसी की परीक्षा प्रणाली का स्वतंत्र ऑडिट कराने और छात्रों को आर्थिक राहत देने के लिए सभी परीक्षाओं के आवेदन फार्म एक रुपये की फीस में उपलब्ध कराए जाने की मांग की।
कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और डॉ. चयनिका उनियाल ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि देश को आज ‘पेपर लीक नक्सल’ से बचाने की जरूरत है।
चिब ने एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा संपन्न होने के दो महीने बाद एजेंसी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने तीन परीक्षाएं दोबारा कराने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इन खामियों को जानबूझकर किस्तों में उजागर कर रही है, ताकि जेन-जी का गुस्सा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर न फूटे।
दिल्ली में हुए छात्रों के प्रदर्शन और प्रधानमंत्री व गृहमंत्री की मानसून सत्र के दौरान सदन से अनुपस्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब देश के युवा दोनों से जवाबदेही मांग रहे थे, तब वे 20 दिनों तक सदन में आए ही नहीं, जिससे स्पष्ट है कि इस सरकार से शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त करने की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जब अपने दोस्त अडानी को देश की जमीनें देनी होती हैं तब सरकार से कोई गलती नहीं होती, लेकिन जैसे ही छात्रों के भविष्य की बात आती है, मोदी सरकार का प्रदर्शन शून्य हो जाता है।
डॉ. चयनिका उनियाल ने कहा कि एनटीए ने स्वयं स्वीकार किया है कि प्रश्न पत्रों में विद्वानों के नामों की स्पेलिंग और किताबों के शीर्षक गलत थे तथा उच्चारण में भी गलतियां थीं। उन्होंने पूछा कि तीन परीक्षाएं रद्द की गईं, तो क्या ऐसी गंभीर गलती करने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों पर कार्रवाई होगी? क्या उनके नाम सार्वजनिक किए जाएंगे? उन्होंने सरकारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि 2023 में एनटीए ने 66 परीक्षाएं कराई थीं जिनमें 1.33 करोड़ छात्र शामिल हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर केवल 29 परीक्षाओं और 85.78 लाख छात्रों पर आ गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह गिरावट एनटीए पर छात्रों के घटते भरोसे का संकेत है? उन्होंने यह कटाक्ष भी किया कि जहां छात्रों का नुकसान हो रहा है, वहीं एनटीए द्वारा पिछले छह वर्षों में परीक्षा फीस से 448 करोड़ रुपये से अधिक की आय का दावा किया गया है।
डॉ. चयनिका ने सरकार से मांग की कि दोबारा परीक्षा देने जा रहे ग्रामीण एवं दूर-दराज के छात्रों को यात्रा और रहने के खर्च का हर्जाना दिया जाए, साथ ही जिन अभ्यर्थियों के पीएचडी दाखिले, जेआरएफ या अन्य अकादमिक अवसर इस देरी से देरी से प्रभावित हुए हैं, उनके लिए सरकार विश्वविद्यालयों को समयसीमा बढ़ाने का निर्देश दे।
वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर कहा कि हजारों अभ्यर्थियों ने वर्षों तैयारी की, आवेदन शुल्क भरा और दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक यात्रा की, लेकिन अब उन्हें सितंबर में फिर से यह सारी प्रक्रिया करनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि गलती एनटीए करता है, लेकिन सजा छात्रों को मिलती है।
उन्होंने पूछा कि एनटीए अब भी असली सवाल का जवाब नहीं दे रहा है कि क्या परीक्षा से पहले ये प्रश्नपत्र लीक हुए थे?
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने यह बात कोटा, देहरादून एवं प्रयागराज में कही है और वह आगे भी कहते रहेंगे कि देश में अब शिक्षा व्यवस्था नहीं बची है; यह वसूली की एक ऐसी मशीन बन गई है जो छात्रों का पैसा, उनका कीमती समय, मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्मविश्वास ले लेती है और बदले में कुछ नहीं देती। यह नौकरी तक नहीं देती।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा ”पहला कदम था, आखिरी नहीं” और एनटीए के नेतृत्व को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसी व्यवस्था बनाई है जो एक परीक्षा तक नहीं करा सकती। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत बर्बाद की जा रही है और वे तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक प्रधानमंत्री मोदी इसका जवाब नहीं देते।










