कस्टोडियल डेथ केस की जांच करेगी CBI, सुप्रीम कोर्ट ने कहा – छत्तीसगढ़ पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं; परिवार को ₹25 लाख मुआवजा

Supreme Court

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस हिरासत में 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले में Supreme Court ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही मृतक के परिवार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश छत्तीसगढ़ सरकार को दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच अब CBI को सौंपते हुए साफ कर दिया है कि जांच में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने राज्य पुलिस से मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड CBI को सौंपने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में FIR दर्ज करने में हुई देरी और राज्य पुलिस की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने CBI को मामले की जांच तेजी से पूरी कर 13 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। वहीं राज्य के DGP को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर CBI निदेशक को सौंपने का आदेश दिया गया है।

मामला जनवरी 2024 का है। श्रवण सूर्यवंशी को 18 जनवरी 2024 को करीब 1,200 रुपए की शराब रखने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। 21 जनवरी 2024 को उसकी मौत हो गई।

बाद में हुई न्यायिक जांच में सामने आया कि हिरासत के दौरान सिर में लगी चोट के कारण उसकी मौत हुई थी। जांच में सिर पर कुंद हथियार से चोट लगने की बात सामने आई थी।

इसके बावजूद मामले में FIR दर्ज करने में काफी देरी हुई। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, FIR 30 जुलाई 2026 को दर्ज की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे को बताया जरूरी

मामले में मृतक की पत्नी और दो बेटियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि श्रवण की मौत हिरासत में हुई हिंसा के कारण हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि श्रवण परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और हिरासत में हुई हिंसा के कारण उसकी असामान्य मौत हुई। ऐसे में परिवार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा दिया जाना चाहिए।

डीजीपी को बताया था पूरी तरह अयोग्य

इस आदेश के बाद अब CBI यह जांच करेगी कि श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई, उसके सिर पर चोट कैसे लगी और इस मामले में कौन जिम्मेदार है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम के जवाब पर भी कड़ी आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा कि ‘छत्तीसगढ़ के DGP पूरी तरह अयोग्य हैं।’

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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