रायपुर। छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी (IPS Ratanlal Dangi) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में SI की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य के गृह सचिव समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त वाले सप्ताह में होगी।
याचिकाकर्ता ने मौजूदा जांच पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच किसी वरिष्ठ महिला IAS अधिकारी से कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि जिन अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी गई है, उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है।
याचिका के मुताबिक, महिला योग सिखाती हैं और इसी दौरान उनकी पहचान तत्कालीन IG रतनलाल डांगी से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच ऑनलाइन योग क्लास को लेकर सामान्य बातचीत होती थी।
महिला का आरोप है कि कुछ समय बाद वीडियो कॉल के दौरान IPS अधिकारी ने कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करना शुरू किया। विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि महिला के पुलिस विभाग में कार्यरत पति के खिलाफ कार्रवाई कराने की धमकी दी गई।
जांच अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
महिला की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने हाईकोर्ट को बताया कि शिकायत की जांच के लिए तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा और DIG मिलना कुर्रे को जिम्मेदारी दी गई थी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि दोनों अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। याचिका में कहा गया है कि आनंद छाबड़ा अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 तक रतनलाल डांगी के समान रैंक यानी IG पद पर तैनात थे। वहीं, याचिका में उनके खिलाफ महादेव सट्टा ऐप मामले से जुड़े आपराधिक प्रकरण का भी उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारियों का रवैया उनके प्रति पक्षपातपूर्ण रहा है।
अधिकारियों को हटाने की मांग, कार्रवाई नहीं होने पर पहुंचीं हाईकोर्ट
याचिका के मुताबिक, महिला ने केंद्रीय गृह सचिव, राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और गृह विभाग के सचिव को आवेदन देकर मौजूदा जांच अधिकारियों को हटाने की मांग की थी।
हालांकि, उनके आवेदन पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
महिला ने मांग की है कि मौजूदा जांच अधिकारियों को हटाकर मामले की जांच वरिष्ठ और स्वतंत्र महिला IAS अधिकारी से कराई जाए।
90 दिन बाद भी चार्जशीट नहीं, कोर्ट ने कहा- मामला गंभीर
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि रतनलाल डांगी के निलंबन के 90 दिन बीत जाने के बावजूद उन्हें आरोप पत्र जारी नहीं किया गया है।
वहीं, याचिका में अधिकारी की कथित अवैध संपत्ति की जांच कराने और आरोप साबित होने की स्थिति में सेवा से बर्खास्तगी की मांग से जुड़ी एक अन्य याचिका का भी उल्लेख किया गया है।
मंगलवार को मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से रखे गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने गृह सचिव समेत संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 31 अगस्त वाले सप्ताह में होगी।










