FCRA Bill Sent JPC: लोकसभा में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव पास हो गया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह प्रस्ताव सदन में रखा, जिसे विपक्षी हंगामे के बीच मंजूरी दे दी गई। इस कमिटी में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। कमिटी अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में पेश करेगी।
विपक्ष का विरोध
बिल पेश होते ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस ने बिल वापस लेने की मांग की। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा विपक्ष इस बिल के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ है और इसे पेश नहीं किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह यह बिल क्यों ला रही है। उनका आरोप था कि इसका मकसद अल्पसंख्यकों को दबाना और व्यवस्था का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि देश में लोकतंत्र मजबूत होना चाहिए।
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी बिल को जेपीसी भेजने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर इसे समिति के पास भेजा जा रहा है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि विपक्ष को पहले से ही आशंका थी कि संस्थाओं के कामकाज में हेरफेर हो सकता है।
सरकार का जवाब
किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। हालांकि विपक्ष का हंगामा जारी रहा, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बिल को जेपीसी भेजने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी रणनीति के मुताबिक मुद्दे उठाता रहेगा। इससे पहले मानसून सत्र में भी विपक्ष ने इस बिल को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अब बिल जेपीसी के पास जाने के बाद इसकी विस्तृत जांच होगी।







