नई दिल्ली। टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (संशोधन) विधेयक, 2026 को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि नए विधेयक के जरिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मुफ्त लेनदेन की वैधानिक गारंटी समाप्त की जा रही है। पार्टी का दावा है कि इससे भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य शुल्क लगाए जाने का रास्ता खुल सकता है, जिसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस का कहना है कि सरकार यह दावा कर रही है कि UPI सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है, जबकि पार्टी के अनुसार यह तर्क सही नहीं है। कांग्रेस ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास UPI जैसी डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था को बिना उपभोक्ताओं या व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए भी वित्तीय सहायता देने की क्षमता है। पार्टी ने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में RBI ने केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष (Surplus) हस्तांतरित किया था। कांग्रेस के अनुसार, इस राशि का एक छोटा हिस्सा भी UPI व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पर्याप्त हो सकता है।
अमेरिकी दबाव का भी लगाया आरोप
कांग्रेस ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि यह संशोधन ऐसे समय लाया गया है, जब अमेरिका की ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में UPI और RuPay के मुफ्त मॉडल की आलोचना की गई थी। पार्टी का आरोप है कि रिपोर्ट में कहा गया था कि UPI और RuPay की वजह से Visa और MasterCard जैसी अमेरिकी भुगतान कंपनियों को भारतीय बाजार में नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या सरकार अमेरिकी दबाव में डिजिटल भुगतान क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के लिए अधिक अवसर बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
सरकार के अन्य फैसलों पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस ने अपने बयान में केंद्र सरकार पर अमेरिका के साथ विभिन्न मामलों में दबाव में आने का भी आरोप लगाया। पार्टी ने दावा किया कि व्यापार, तेल आयात और अन्य नीतिगत फैसलों में भी सरकार ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का काम किया है। कांग्रेस ने इसे देश के आर्थिक हितों के खिलाफ बताया।
सरकार की ओर से क्या स्थिति?
समाचार लिखे जाने तक केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। सरकार पहले भी UPI को बढ़ावा देने और डिजिटल भुगतान को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराती रही है।










