नई दिल्ली। TMC सांसद और ममता बनर्जी के करीबी सौगत रॉय ने दावा किया है कि पार्टी के कई बागी सांसद जो NDA के साथ जुड़ गए हैं। वह अब बेचैन महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के साथ बने रहने के लिए उन पर हर तरह का दवाब बनाया जा रहा है।अगर बागी सांसदों का रुख बदला तो यह बीजेपी के चाणक्य और गृहमंत्री अमित शाह के लिए तगड़ा झटका होगा। जिसका असर कई महत्वपूर्ण बिलों पर पड़ेगा जो शीतकालीन सत्र में लाये जाने हैं।
बागियों की घर वापसी के इमकान
सौगत रॉय ने कहा कि कई बागी सांसद उनके संपर्क में हैं। मैंने उनमें से कुछ से बात की है। वे BJP में असहज हैं। हो सकता है कि उन पर बने रहने का दबाव हो और उन्हें धमकाया जा रहा हो। अगर वे सभी वापस आते हैं तो यह अच्छी बात होगी। मैंने इस बारे में हाईकमान से भी बात की है।
बैठक से नदारद रहे तीन सांसद
दरअसल, NCPI के तीन नेता मंगलवार को NDA की मंगल मिलन बैठक से नदारद रहे। इसके बाद सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या वह तीनों ममता के पास वापस जा सकते हैं। NCPI ने इस तरह के कयासों को खारिज किया है। बता दें कि, NCPI नेता अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान NDA की बैठक में शामिल नहीं हुए। यह पहली बार था जब पार्टी केंद्र में सत्ताधारी गठबंधन की बैठक में शामिल हुई थी।गौरतलब बात है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी और घोषणा की थी कि वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो रहे हैं। पार्टी ने कहा था कि वह NDA का समर्थन करेगी।
ममता ले सकती है दलबदल याचिका वापस
ममता बनर्जी गुट के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने यह भी दावा किया कि इस पूरे विषय पर पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की नजर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि बागी सांसद पार्टी में लौटते हैं, तो संसद में उनकी सदस्यता रद्द कराने के लिए दायर की गई याचिका को वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।
ओम बिरला ने नहीं दी है अलग ग्रुप की मान्यता
टीएमसी के बागी सांसदों को अभी तक स्पीकर ओम बिरला ने औपचारिक रूप से अगल मान्यता नहीं दी है, लेकिन जब मानसून सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक के दौरान NCPI को अलग से बुलाया गया तो विपक्ष ने बायकॉट कर दिया। सत्र के दौरान भी ममता बनर्जी गुट और बागी गुट के बीच खींचतान दिखाई दे रही है।










