Lens Expose: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में एक बार फिर गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य की मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन (CGMSCL) द्वारा खरीदी गई Paracetamol की कई बैच लैब टेस्ट में फेल हो गईं। विभाग ने कंपनी को नोटिस भी भेजा लेकिन कंपनी ने तकनीकी बहाना लेकर खुद को बचाने की कोशिश की। RTI से मिले दस्तावेज अब इस दावे की पोल खोल रहे हैं।
लैब रिपोर्ट में क्या निकला?
अक्टूबर 2025 में CGMSCL ने 9M इंडिया लिमिटेड की Paracetamol 500 मिलीग्राम और 650 मिलीग्राम की सैंपल जांच के लिए भेजीं। नियम के मुताबिक सैंपल कोडेड थे, यानी लैब को कंपनी का नाम और बैच नंबर नहीं बताया गया था। एक महीने बाद रिपोर्ट आई। दोनों टेस्ट में दवा ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ यानी अमानक पाई गई। डिसॉल्यूशन टेस्ट में दवा समय पर शरीर में नहीं घुल रही थी। एसे टेस्ट में सक्रिय तत्व (एपीआई) की मात्रा भी कम निकली।
दिसंबर 2025 में विभाग ने कंपनी को शो-कॉज नोटिस भेजा। नोटिस में तीन बातें कही गईं
-तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट क्यों न किया जाए?
-टेंडर शर्तों के मुताबिक कार्रवाई क्यों न हो?
-और 60 दिनों में नई बैच सप्लाई कर फेल बैच का खर्च कंपनी वहन करे।
कंपनी का जवाब – ‘ये दवा हमारी नहीं’
15 दिसंबर को 9एम इंडिया ने जवाब दिया। कंपनी का कहना था कि नोटिस में बताए गए बैच नंबर लैब रिपोर्ट में दर्ज ही नहीं हैं और रिपोर्ट में निर्माता का नाम भी नहीं लिखा है। इसलिए इसे हमसे नहीं जोड़ा जा सकता। कंपनी ने यह भी कहा कि कुछ टेस्ट आईपी मानकों के अनुसार नहीं हुए और जांच स्वतंत्र सरकारी लैब में नहीं, बल्कि विभाग की नियंत्रण वाली लैब में हुई। यानी कंपनी ने विभाग के ही कोडिंग नियम का हवाला देकर जिम्मेदारी से इनकार कर दिया।
RTI दस्तावेज क्या कहते हैं?
द लेंस को आरटीआई से मिले कागजात कंपनी के इस दावे के खिलाफ हैं। सीजीएमएससीएल के सूचना अधिकारी ने आरटीआई जवाब में स्वीकार किया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से अब तक 9M इंडिया की कई बैच अमानक पाई गई हैं। सूची भी संलग्न की गई। सबसे महत्वपूर्ण सबूत परचेज ऑर्डर हैं। जिन बैचों को कंपनी ‘अपनी नहीं’ बता रही है, वे सभी सीजीएमएससीएल के खरीद आदेश के खिलाफ उसी कंपनी ने सप्लाई की थीं। यानी दवा 9M की खरीदी गई, फेल होने पर कंपनी कह रही है – ये हमारी नहीं।
टेंडर की शर्तों (नियम 8.13 और 9.2) में साफ लिखा है कि अमानक बैच जब्त होगी, 60 दिनों में नई सप्लाई करनी होगी, पैसा वापस होगा, तीन बैच फेल होने पर तीन साल की ब्लैकलिस्टिंग होगी और 20 प्रतिशत पेनल्टी भी लगेगी। फिर भी कार्रवाई अटकी हुई नजर आती है।
पहले भी यही पैटर्न
यह अकेला मामला नहीं है। इससे पहले 9एम इंडिया की डाइसाइक्लोमाइन टैबलेट को लेकर दुर्ग, जशपुर और महासमुंद से शिकायतें आई थीं। विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री ने ‘कोई शिकायत नहीं’ कहा था, जबकि विभाग के पास फाइलें और जांच के आदेश मौजूद थे।
मार्च 2025 में प्रदेश कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सीजीएमएससीएल अधिकारियों ने कंपनी को अनुचित लाभ दिया। ऊंची दर, सिंगल बिड और कार्टेल का जिक्र करते हुए सीबीआई जांच की मांग की गई थी।
सवाल जो अभी भी अनुत्तरित हैं
जब सप्लाई रिकॉर्ड कंपनी के नाम पर है, तो ‘हमारी नहीं’ कहने का आधार क्या?
अगर कंपनी दोषी नहीं, तो ब्लैकलिस्टिंग क्यों रोकी गई?
विभाग ने डिकोड करके कार्रवाई क्यों नहीं की?
सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली आम दवा पैरासिटामोल की गुणवत्ता पर सवाल उठना मरीजों की सेहत से सीधा जुड़ा मामला है। दवा फेल हुई, सबूत मौजूद हैं, नोटिस गया, फिर तकनीकी बहाना और विभाग की चुप्पी। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल इस मामले की स्वतंत्र जांच कराएंगे या नहीं – यह अभी स्पष्ट नहीं है। मरीजों की सुरक्षा और जवाबदेही दोनों दांव पर हैं।











