लेंस डेस्क। भारतीय Youth Congress ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने रायसीना रोड स्थित यूथ कांग्रेस कार्यालय से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली के अलावा कई अन्य राज्यों से भी शामिल हुए।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल
युवा कांग्रेस का कहना है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार जवाबदेह है। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में जवाब देने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान उदयभानु चिब ने कहा कि यदि पुलिस की कार्रवाई गृह मंत्रालय के निर्देश पर हुई है तो इसकी जिम्मेदारी गृह मंत्री को लेनी चाहिए। वहीं, यदि बिना किसी निर्देश के ऐसा हुआ है तो यह सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्य मामलों में मंत्रियों से जवाबदेही तय की गई, उसी तरह इस मामले में भी जवाब मांगा जाना चाहिए।
कई राज्यों से पहुंचे कार्यकर्ता
युवा कांग्रेस के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के अलावा असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे। सुबह से ही रायसीना रोड स्थित कार्यालय पर कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। दोपहर करीब 1:30 बजे मार्च शुरू हुआ, जो जंतर-मंतर पहुंचने के बाद प्रदर्शन में बदल गया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कार्यकर्ता वापस अपने कार्यालय लौट गए।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों की तैनाती की गई थी। पूरे मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाए और छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और सरकार को इस पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।










