US-Iran Tension : पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ तीखे बयान और सैन्य चेतावनियां जारी हैं। इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिकी हमले नहीं रुके तो अमेरिका को 9/11 जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है। इस बयान के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
IRGC ने दी कड़ी चेतावनी
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, IRGC ने अपने बयान में कहा कि यदि मौजूदा संघर्ष जारी रहा तो ऐसे अभियान चलाए जाएंगे जिनके परिणाम अमेरिका के लिए बेहद गंभीर होंगे। संगठन ने दावा किया कि हालात ऐसे बन सकते हैं, जिनसे अमेरिका में राष्ट्रीय शोक जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाए।
ट्रंप ने दी जवाबी चेतावनी
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी वाणिज्यिक जहाज पर मिसाइल, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला किया तो अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर यह चेतावनी जारी की।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
दोनों देशों के बीच विवाद का प्रमुख कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है। अमेरिका का आरोप है कि पिछले तीन महीनों में ईरान ने 30 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए हैं और जून में हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित समझौते की पहली शर्त यही होगी कि ईरान समुद्री मार्गों पर हमले बंद करे और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सामान्य होने दे।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका पिछले दो सप्ताह से दक्षिणी ईरान में कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर लगातार हवाई हमले कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर ईरान के अत्यधिक सुरक्षित परमाणु प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
ईरान ने अमेरिकी चेतावनी का जवाब देते हुए कहा है कि यदि उसके परमाणु ठिकानों या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया तो इसे क्षेत्रीय युद्ध का विस्तार माना जाएगा। तेहरान ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
9/11 का क्यों किया गया जिक्र?
IRGC की चेतावनी में 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमले का उल्लेख किया गया। उस दिन चार यात्री विमानों का अपहरण कर अमेरिका में हमला किया गया था। दो विमान न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकराए, जबकि तीसरा विमान पेंटागन और चौथा विमान पेनसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस हमले में लगभग 3,000 लोगों की मौत हुई थी और यह अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी आतंकवादी घटनाओं में शामिल है।
क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है।











