बिजली कंपनी का IPO लाएगी छत्तीसगढ़ सरकार, 26% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी; 10 हजार करोड़ के बकाये के बीच फैसले पर उठे सवाल

CSPTCL

रायपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने बिजली कंपनी से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने CSPTCL यानी छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड आईपीओ के जरिए शेयर बाजार में उतारने की मंजूरी दे दी है।

सरकार इसे बिजली क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन इस फैसले के साथ कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार पर बिजली कंपनियों का करीब 10 हजार करोड़ रुपए बकाया है, तब शेयर बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी भवन मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में CSPTCL को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का दावा है कि इससे आम नागरिक और निवेशक कंपनी की विकास यात्रा में भागीदार बन सकेंगे और कंपनी को विस्तार के लिए अतिरिक्त पूंजी मिलेगी।

सूत्रों के मुताबिक सरकार कंपनी की लगभग 26 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में बेचने की तैयारी कर रही है। हालांकि इस प्रतिशत की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक हलकों में इसकी चर्चा तेज है।

सरकार का कहना है कि आईपीओ आने से कंपनी की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी और बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार के लिए नए संसाधन उपलब्ध होंगे। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी को अधिक जवाबदेह और पेशेवर तरीके से काम करना होगा।

लेकिन यहीं से सवाल भी शुरू होते हैं।

जानकारों का कहना है कि राज्य सरकार पर बिजली क्षेत्र का करीब 10 हजार करोड़ रुपए बकाया है। ऐसे में यदि सरकार यह राशि बिजली कंपनियों को दे दे तो उनकी वित्तीय स्थिति काफी हद तक मजबूत हो सकती है। फिर सरकार हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटाने का रास्ता क्यों चुन रही है?

क्या यह कदम वास्तव में कंपनी के विस्तार के लिए है या फिर वित्तीय दबाव कम करने की कोशिश?

आलोचकों का तर्क है कि सरकारी कंपनी की हिस्सेदारी बेचने से पहले सरकार को अपनी लंबित देनदारियों का भुगतान करना चाहिए। वहीं सरकार का पक्ष है कि आईपीओ केवल धन जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्थागत सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने का भी जरिया है।

यदि 26 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में आती है तो यह छत्तीसगढ़ के बिजली क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय बदलाव माना जाएगा।

फिलहाल कैबिनेट ने आईपीओ को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब आगे की प्रक्रिया कंपनी का संचालक मंडल और बाजार नियामक संस्थाएं तय करेंगी। लेकिन इस फैसले ने एक बहस जरूर छेड़ दी है—जब सरकार पर ही 10 हजार करोड़ रुपए का बकाया है, तब समाधान बकाया चुकाना है या फिर सरकारी कंपनी के शेयर बेचना?

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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