रायपुर। छत्तीसगढ़ में बस से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को जल्द ही महंगे किराए का सामना करना पड़ सकता है। परिवहन विभाग निजी बस ऑपरेटरों की मांग पर Bus Fare में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। यह प्रस्ताव जल्द ही परिवहन मंत्री और मुख्यमंत्री के समक्ष मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।
हालांकि प्रस्तावित वृद्धि 10-15 प्रतिशत बताई जा रही है, लेकिन इसका वास्तविक असर यात्रियों की जेब पर कहीं अधिक पड़ सकता है। वजह यह है कि बस ऑपरेटर पहले से ही कई मार्गों पर पुराने स्वीकृत किराए की बजाय अधिक किराया वसूल रहे हैं। ऐसे में नई वृद्धि लागू होने पर कुल किराया बोझ लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बढ़ती लागत का हवाला
बस संचालकों का कहना है कि डीजल की कीमतों में वृद्धि, कर्मचारियों के वेतन, स्पेयर पार्ट्स, टायर, बीमा और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उनका दावा है कि वर्तमान किराया संरचना में बसों का संचालन घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक बस ऑपरेटरों ने किराए में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि की मांग रखी थी, लेकिन परिवहन विभाग फिलहाल 10 से 15 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
किराया वृद्धि का सबसे अधिक असर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है। रोजाना काम, पढ़ाई, व्यापार और इलाज के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले लोगों की यात्रा लागत बढ़ जाएगी।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी रूट का Bus Fare पहले 600-650 रुपये था और वर्तमान में यात्रियों से लगभग 800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, तो नई वृद्धि के बाद यह किराया करीब 900 रुपये तक पहुंच सकता है। यानी यात्रियों को पहले की तुलना में लगभग 250 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।
पहले से चल रही है कार्रवाई
इसी बीच परिवहन विभाग ने बस स्टैंडों में ओवरलोडिंग, अवैध किराया वसूली और नियमों के उल्लंघन को लेकर जांच अभियान भी शुरू किया है। हाल ही में विभिन्न बस स्टैंडों पर जांच के दौरान कई बसों में अनियमितताएं पाए जाने पर कार्रवाई और जुर्माना लगाया गया।
फिलहाल किराया वृद्धि पर अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है। परिवहन मंत्री और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद ही नई दरें लागू होंगी। यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो आने वाले दिनों में बस यात्रियों की जेब पर महंगाई का एक और बोझ बढ़ सकता है।
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