रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव (TS Singhdeo) ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल परियोजना को मिली मंजूरी पर केंद्र और राज्य सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अडानी के एमडीओ वाली एक और कोल परियोजना को मंजूरी देकर सरकार ने हसदेव अरण्य, पर्यावरण और ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है।
सिंहदेव ने कहा कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित इस कोल खदान परियोजना का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा हसदेव अरण्य के संरक्षित और आरक्षित घने वन क्षेत्रों में आता है। इस परियोजना से करीब 1742.6 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी और लगभग 7 लाख पेड़ों की कटाई होगी।
उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र सरगुजा के ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ से लगा हुआ है। कोल परियोजना की स्वीकृति के साथ ही रामगढ़ पहाड़ और वहां स्थित मंदिरों के अस्तित्व पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। सिंहदेव ने बताया कि प्रस्तावित खदान रामगढ़ के मुख्य मंदिर से हवाई दूरी में महज 8 किलोमीटर दूर है। पहले से संचालित अन्य कोल परियोजनाओं के कारण रामगढ़ पहाड़ में दरारें आने, चट्टानें टूटने और भू-स्खलन जैसी स्थिति बनने लगी है।
पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में किसी भी नई कोल परियोजना को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर सभी दलों के विधायकों की सहमति थी और इसे केंद्र सरकार को भेजा गया था।
सिंहदेव ने यह भी याद दिलाया कि जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र देकर कहा गया था कि हसदेव क्षेत्र में नई कोल खदानें गैर जरूरी हैं। इसके बावजूद मौजूदा भाजपा सरकार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा केते एक्सटेंशन परियोजना को मंजूरी देना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला रामगढ़ पहाड़ और वहां स्थित भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान मंदिरों की ऐतिहासिक पहचान को खतरे में डालने वाला है। सिंहदेव ने कहा कि यदि भविष्य में रामगढ़ पहाड़ प्रभावित होता है, मंदिरों तक पहुंचने का रास्ता बंद होता है या संरचनात्मक नुकसान होता है, तो इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप और स्थानीय विधायक व मंत्री राजेश अग्रवाल जिम्मेदार होंगे।
टीएस सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान उन्होंने और उनकी पार्टी ने संवैधानिक तरीके से हसदेव अरण्य को बचाने का प्रयास किया था। लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार विधानसभा के पारित प्रस्ताव को ही नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की पूरी कार्यप्रणाली एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने और उसे खुश करने के उद्देश्य से संचालित हो रही है, न कि जनहित में।
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