रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने छत्तीसगढ़ आबकारी निगम में हुए कथित मैन पाॅवर ओवरटाइम भुगतान घोटाले (CSMCL Overtime Scam) में गिरफ्तार 12 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में पहला चालान पेश कर दिया है।
जांच एजेंसी के अनुसार इस घोटाले में करोड़ों रुपए की अनियमितता और कमीशनखोरी का मामला सामने आया है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त कार्य दिवस भुगतान और सर्विस चार्ज के नाम पर लगभग 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। जांच में पाया गया कि यह राशि वास्तविक रूप से आबकारी दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों को दी जानी थी, लेकिन इसका इस्तेमाल कमीशन भुगतान और संबंधित कंपनियों के आर्थिक लाभ के लिए किया गया।
मामले में जिन 12 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया है उनमें अनवर ढेबर, नवीन प्रताप सिंह तोमर, तिजाराम निर्मलकर, अभिषेक सिंह, नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत दरंदले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, एन. उदय राव, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन शामिल हैं।
ईओडब्ल्यू ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471 और 120-बी के तहत अपराध दर्ज किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि विवेचना के दौरान कई वित्तीय दस्तावेज और लेन-देन के प्रमाण मिले हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई की गई है।
फिलहाल मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय में जारी है और जांच एजेंसी आगे भी कई अहम खुलासों की संभावना जता रही है।
डीएमएफ घोटाला केस में भी EOW का पूरक चालान
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बहुचर्चित डीएमएफ घोटाला मामले में भी विशेष न्यायालय में करीब 5000 पन्नों का पूरक चालान पेश किया है।
जानकारी के मुताबिक इस चालान में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और महासमुंद के कारोबारी सतपाल छाबड़ा की भूमिका को लेकर कई अहम खुलासे किए गए हैं। जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत किए हैं।
पूरक चालान में कथित अनियमितताओं, धन के उपयोग और विभिन्न व्यक्तियों की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया है। फिलहाल विशेष न्यायालय में मामले की सुनवाई जारी है।
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