रायपुर। ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (TUCI) ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध संहिता 2026 का पुरजोर विरोध किया है। संगठन का कहना है कि यह नई संहिता मजदूरों के अधिकारों पर हमला है और पूंजीपतियों को ज्यादा छूट देने के लिए लाई जा रही है।TUCI के राज्य संयोजक सौरा ने श्रम विभाग को सौंपे प्रेस नोट में कहा कि यह नया कानून केंद्र सरकार के चार श्रम कोड्स की तर्ज पर बनाया गया है, जो मजदूर विरोधी और कॉरपोरेट परस्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे खासकर असंगठित और ठेका मजदूरों के अधिकारों को गंभीर खतरा है।
TUCI की मुख्य आपत्तियां
हड़ताल का अधिकार सीमित, अब लगभग सभी फैक्टरियों में हड़ताल से पहले 14 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे मजदूरों का संघर्ष करना मुश्किल हो जाएगा।
संगठन ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे खनन, कोयला, इस्पात और भारी उद्योग वाले राज्य में इस कानून का सबसे ज्यादा नुकसान होगा। इससे ठेका मजदूर बढ़ेंगे, स्थायी रोजगार कम होगा और आदिवासी-भूविस्थापितों के अधिकार भी प्रभावित होंगे।TUCI ने मांग की है कि राज्य सरकार मजदूर हितों की रक्षा करे, ठेका प्रथा को हतोत्साहित कर स्थायी रोजगार को बढ़ावा दे और श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करे।








