माओवादी संगठन ने ‘देवजी’ पर बोला हमला, आत्मसमर्पण को बताया गद्दारी

CPI Maoist

बस्तर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, माओवादी (CPI Maoist) की नॉर्थ कोऑर्डिनेशन कमेटी (NCC) की ओर से 17 अप्रैल को एक प्रेस नोट सामने आई है, जिसमें संगठन ने अपने पूर्व सदस्य बताए जा रहे ‘देवजी’ पर तीखा हमला बोला है। प्रेस नोट में देवजी और उनके समर्थकों के रास्ते को ‘नव-प्रचंड मार्ग’ बताते हुए उसे अवसरवाद, समर्पणवाद और संशोधनवाद करार दिया गया है।

माओवादी संगठन ने कहा है कि इतिहास में हमेशा दो राजनीतिक धाराओं के बीच संघर्ष रहा है। संगठन ने एक ओर मार्क्स, लेनिन, स्टालिन, माओ, चारु मजूमदार जैसे नेताओं का उल्लेख किया, वहीं दूसरी ओर देवजी, प्रचंड और अन्य नामों को ‘गद्दार’ बताया।

प्रेस नोट में दावा किया गया है कि देवजी पहले संगठन से जुड़े थे, लेकिन आत्मसमर्पण के बाद उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है। संगठन ने उन्हें भारतीय क्रांति और विश्व सर्वहारा का ‘विश्वासघाती’ बताया है।

प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि माओवादी पार्टी अपने ‘सशस्त्र और भूमिगत संघर्ष’ की लाइन पर कायम है। संगठन ने कहा कि भारत जैसे देश में क्रांति का रास्ता मुख्यतः सशस्त्र संघर्ष के जरिए ही संभव है और गुरिल्ला युद्ध के विस्तार से वैकल्पिक जनसत्ता की नींव रखी जाएगी।

माओवादी संगठन ने देवजी के उस कथित बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कानूनी और खुले राजनीतिक रास्ते से पार्टी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की बात कही थी। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि भूमिगत पार्टी को कानूनी संगठन में बदलना ‘लिक्विडेशनिज्म’ यानी समर्पणवाद है, जिसकी पार्टी कड़ी निंदा करती है।

प्रेस नोट में नेपाल के संदर्भ में “प्रचंडवाद” का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसा रास्ता भविष्यहीन साबित हुआ है। संगठन ने मीडिया में चल रही अंदरूनी विभाजन की चर्चाओं को भी खारिज करते हुए कहा कि पार्टी में कोई विभाजन नहीं है, बल्कि अवसरवादी तत्वों के खिलाफ वैचारिक संघर्ष चल रहा है।

सुरक्षा एजेंसियां इस दस्तावेज को माओवादी संगठन के भीतर वैचारिक टकराव और आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देख रही हैं।

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