छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी फेडरेशन 1 मई को रायगढ़ में वित्त मंत्री कार्यालय घेरेगा

रायपुर। छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी फेडरेशन ने मजदूर दिवस (1 मई) के मौके पर रायगढ़ स्थित वित्त मंत्री के कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है। फेडरेशन का आरोप है कि सरकार ने चुनाव के समय दैनिक वेतनभोगी, अनियमित और ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण-स्थायीकरण का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद अब मंत्री इन मुद्दों पर टालमटोल कर रहे हैं। फेडरेशन के संयोजक रामकुमार सिन्हा ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में कोई खास फर्क नहीं रह गया है। सत्ता हासिल करने के लिए आकर्षक वादे किए जाते हैं लेकिन सत्ता में आने के बाद दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों, स्कूल सफाई कर्मचारियों, सुरक्षा श्रमिकों और दैनिक श्रमिकों को भुला दिया जाता है।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें

फेडरेशन ने 1 मई को घेराव के दौरान निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

सभी विभागों में काम कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
जिनकी सेवा अवधि 2 वर्ष पूरी हो चुकी है, उन्हें स्थायी किया जाए।
वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आकस्मिकता कार्यभारित सेवा नियम जल्द लागू किया जाए।
केंद्र सरकार के 4 श्रम कानून कोड के अनुसार वेतन वृद्धि की जाए और केन्द्र के बराबर वेतन दिया जाए।
श्रम सम्मान राशि से वंचित कर्मचारियों को 4,000 रुपये की राशि दी जाए।
स्कूल सफाई कर्मचारियों को अंशकालिक की बजाय पूर्णकालिक बनाकर श्रमायुक्त दर से वेतन दिया जाए।
ठेका, आउटसोर्स और प्लेसमेंट प्रथा तुरंत बंद की जाए।
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती रोककर पहले दैनिक वेतनभोगियों को कार्य अनुभव के आधार पर समायोजित किया जाए।
मजदूर दिवस को सरकारी अवकाश घोषित किया जाए।
कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार को 10 लाख रुपये अनुकंपा अनुदान और एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट का हवाला

फेडरेशन ने उमादेवी प्रकरण का हवाला देकर नियमितीकरण में बाधा डालने का आरोप लगाया। संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि लंबे समय से काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद विभागों में बैकडोर एंट्री का बहाना बनाकर कर्मचारियों को अधिकारों से दूर रखा जा रहा है। रामकुमार सिन्हा ने कहा, “देर से दिया गया न्याय भी अन्याय के समान होता है। जब भूख लगी हो तो खाना नहीं दिया जाता, और जब भूख मिट जाए तो छप्पन भोग देने से कोई फायदा नहीं। चार साल में फैसला नहीं ले पाने वाली सरकार छह महीने में क्या कर पाएगी?”

फेडरेशन का आह्वान

छत्तीसगढ़ दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी फेडरेशन ने सभी विभागों, निगमों, मंडलों और बोर्डों में काम कर रहे दैनिक वेतनभोगी, वाहन चालक, कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सुरक्षा श्रमिक, स्कूल सफाई कर्मचारी और तेंदुपत्ता गोदाम श्रमिकों से अपील की है कि वे 1 मई को रायगढ़ में वित्त मंत्री कार्यालय के घेराव को भारी संख्या में पहुंचकर सफल बनाएं। प्रदेश संगठन मंत्री विजय पटेल, प्रदेश प्रवक्ता मनोज सोना, प्रचार प्रसार प्रभारी डोगेश्वर पटेल, किशोर नगपुरे, पारसमणी साहू, विष्णु चौहान, सुनील महवार, चाँदसिंह निर्लमकर, चितरंजन दास समेत कई पदाधिकारियों ने इस आंदोलन को मजबूत बनाने का आह्वान किया है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories