रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक लेंसकार्ट (Lenskart) शोरूम में घुसकर कर्मचारियों को तिलक लगाने का मामला सामने आया है। हिंदू संगठन धर्म जागरण समिति के कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों से उनका नाम पूछा और उनसे तिलक लगाकर काम करने की बात कही। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित लेंसकार्ट शोरूम में ड्रेस कोड को लेकर विवाद के बाद हिंदू संगठनों ने नारेबाजी की थी और कर्मचारियों को तिलक और कलावा पहनाया था। इसके बाद अब रायपुर के एक शोरूम में भी इसी तरह की घटना सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक, धर्म जागरण समिति से जुड़े कुछ कार्यकर्ता रायपुर के लेंसकार्ट शोरूम पहुंचे और वहां ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। इसके बाद उन्होंने शोरूम में मौजूद कर्मचारियों से नाम पूछे और उन्हें तिलक लगाया। कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों से कहा कि वे तिलक लगाकर बैठें और लोगों को बताएं कि वे हिंदू हैं।
वीडियो में महिला कार्यकर्ता की अपील
वायरल वीडियो में एक महिला कार्यकर्ता कर्मचारियों से कहती हुई दिखाई देती है कि यदि मुस्लिम या क्रिश्चियन समुदाय के लोग अपने धार्मिक प्रतीकों के साथ आते हैं तो उन्हें रोका नहीं जाता। ऐसे में हिंदू कर्मचारियों को भी अपने धर्म का प्रतीक तिलक लगाकर बैठना चाहिए और इस पर गर्व करना चाहिए।
महिला ने यह भी कहा कि वह खुद इस शोरूम से तीन चश्मे बनवा चुकी है और कई लोगों को यहां से चश्मा बनवाने की सलाह दी थी। हालांकि कंपनी पर हिंदू धर्म के खिलाफ काम करने का आरोप लगाते हुए उसने लेंसकार्ट का बहिष्कार करने की बात कही और अपना चश्मा तोड़ने की भी बात कही।
वायरल डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ विवाद, कंपनी ने दी सफाई
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट की कथित ‘एम्प्लॉई ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक पुराना डॉक्यूमेंट वायरल हो गया। इस डॉक्यूमेंट में कर्मचारियों को तिलक और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद इंटरनेट पर कंपनी के बहिष्कार की मांग उठने लगी।
विवाद बढ़ने के बाद लेंसकार्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि वायरल हो रहा डॉक्यूमेंट पुराना है और यह कंपनी की मौजूदा नीति को नहीं दर्शाता।
कंपनी के मुताबिक, नई इन-स्टोर स्टाइल गाइड में सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों जैसे तिलक, बिंदी, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी को मान्यता दी गई है। कंपनी ने यह भी कहा कि अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उसे इसका खेद है।
लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल ने भी इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि कंपनी की नीति में धार्मिक अभिव्यक्ति पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और इससे पैदा हुए भ्रम के लिए कंपनी माफी मांगती है।
फिलहाल रायपुर की इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं कॉर्पोरेट ग्रूमिंग पॉलिसी और धार्मिक अभिव्यक्ति के बीच संतुलन को लेकर भी बहस तेज हो गई है।








