रायपुर। छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए खरीदी गई साड़ियों के घोटाले (Saree Ghotala) का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगभग 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए करीब 9.7 करोड़ (पौने 10 करोड़) रुपये की लागत से खराब साड़ियां खरीदी गई थीं। अब एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस गड़बड़ी की जांच के लिए जिस अधिकारी को जांच कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, वही खराब साड़ी खरीदने वाली परचेस कमेटी का प्रभारी था।

मिली जानकारी के अनुसार, 6 अप्रैल को महिला एवं बाल विकास विभाग ने 6 सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। इस जांच समिति का अध्यक्ष दिलदाल सिंह मरावी (संयुक्त संचालक, महिला एवं बाल विकास) को बनाया गया है।
इस समिति में कोई भी तकनीकी सदस्य नहीं है, जो कपड़े या साड़ी का जानकार हो। ऐसे में इस समिति के गठन के औचित्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जांच समिति के अध्यक्ष दिलदाल सिंह मरावी ही परचेस कमेटी के अध्यक्ष थे।
ऐसे में खरीदी प्रक्रिया में सीधे तौर पर जुड़े अफसर को ही जांच की जिम्मेदारी देना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। इसके अलावा 4 सदस्य और एक संयोजक समिति में रखे गए हैं।
इसके अलावा एक गंभीर सवाल यह है कि जनवरी 2026 में ही इस गड़बड़ी की प्रारंभिक जांच कराई गई थी। उस समय भी साड़ियों की गुणवत्ता और लंबाई को लेकर अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी। इसके बाद भी खरीदी कर ली गई।
करीब पौने दस करोड़ की खरीदी में गड़बड़ी की जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी में 2 सदस्य गांधी भारद्वाज (संयुक्त संचालक), बीडी पटेल (उप संचालक) और एक संयोजक शिव सोनी (सहायक संचालक) जनवरी 2026 में हुई तीन सदस्यीय जांच समिति में शामिल थे। इनकी जांच रिपोर्ट की अनदेखी कर खरीदी की गई और गड़बड़ी हुई।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पहली जांच रिपोर्ट मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ और उसी पैटर्न पर साड़ियों का वितरण जारी रहा। अब फिर से शिकायतें बढ़ने पर विभाग ने प्रत्येक जिले में साड़ियों की जांच के आदेश दिए हैं।
पूरा मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि जब जनवरी 2026 में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी थी, तो उसके बाद भी समान प्रकार की साड़ियों का वितरण कैसे जारी रहा? और दूसरी जांच समिति का नेतृत्व उसी अधिकारी को क्यों सौंपा गया जो पहले से ही खरीद प्रक्रिया से जुड़े थे?
6.3 मीटर की जगह 5.5 मीटर की साड़ी की सप्लाई
दरअसल, करीब पौने दस करोड़ की जो साड़ी खरीदी गई, वह वर्क ऑर्डर के निर्देशों के खिलाफ थी।
वर्क ऑर्डर में स्पष्ट रूप से निर्देश था कि साड़ी की कुल लंबाई 6.3 मीटर होगी, जिसमें 5.5 मीटर साड़ी और 80 सेंटीमीटर ब्लाउज पीस शामिल रहेगा। लेकिन वितरण के बाद कई जिलों से शिकायतें सामने आईं कि साड़ियां तय मानक से कम लंबाई की हैं। कहीं 5.5 मीटर से कम, तो कहीं केवल 5 मीटर तक की साड़ियां दी गईं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि न केवल साड़ियों की लंबाई कम है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बेहद खराब है। कई जगहों पर धोने के बाद साड़ियों का रंग उतर गया और कपड़ा सिकुड़ गया, जिससे वे उपयोग के योग्य भी नहीं रह गईं।
कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि बाजार में यही साड़ियां 250 रुपये या उससे भी कम कीमत में उपलब्ध हैं, जबकि सरकार ने प्रति साड़ी 500 रुपये का भुगतान किया है।








