रायपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पॉवर प्लांट (Vedanta power plant accident) में हुए भीषण हादसे को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने कहा कि राज्य में औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही हो रही है।
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सक्ती में तीन दिन पहले हुए इस बड़े हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई और 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हो रही हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद हर तीन महीने में कोई न कोई बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आ रहा है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई वर्षों में औद्योगिक दुर्घटनाओं में 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के जांच दल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों से बातचीत की। जांच के दौरान मौके पर भयावह स्थिति देखने को मिली और आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है।
उन्होंने कहा कि बंद पड़े एथेनॉल प्लांट को वेदांता ग्रुप ने खरीदा था और करीब एक साल पहले इसे फिर से शुरू किया गया। लंबे समय से बंद प्लांट को चालू करने से पहले पूरी तरह से कमीशनिंग और तकनीकी जांच जरूरी होती है, लेकिन मौके पर मशीनों में जंग और कई पार्ट्स खराब हालत में मिले। जांच दल को वहां नए पार्ट्स भी नजर नहीं आए।
बैज ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह हादसा बॉयलर ब्लास्ट के कारण हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बॉयलर का उपयोग निर्धारित प्रेशर लिमिट से ज्यादा किया जा रहा था। इसके अलावा वाटर लेवल इंडिकेटर की स्थिति भी संदिग्ध बताई गई है।
सामान्य धाराओं में FIR, मजिस्ट्रेट जांच की जगह न्यायिक जांच कराए सरकार: महंत
उन्होंने कहा कि यह हादसा घोर लापरवाही का नतीजा है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि अगर पार्टी का जांच दल घटनास्थल पर नहीं जाता तो मामले में लीपापोती हो सकती थी। कांग्रेस ने राज्य सरकार से मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने कहा कि 20 लोगों की मौत के बावजूद मामले में बहुत सामान्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है, जिससे आरोपियों को घर बैठे ही जमानत मिल सकती है।
महंत ने कहा कि इतने बड़े हादसे में गैर-जमानती धाराएं लगाई जानी चाहिए और दोषियों पर BNS की धारा 105 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बड़े उद्योगपतियों के सामने सरेंडर करती नजर आ रही है।
महंत ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच किसी सीनियर आईएएस अधिकारी के माध्यम से कराई जाए और एफआईआर में पूरे संदर्भ के साथ जांच आगे बढ़ाई जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के सिटिंग जज के जरिए पूरी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि घटना की निष्पक्ष सच्चाई सामने आ सके।
UCC से आदिवासी के अधिकारों पर पड़ेगा असर
दीपक बैज ने यूसीसी को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इससे आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत से अधिक आदिवासी आबादी निवास करती है और यहां पंचायत एक्ट 1996 लागू है, जिसके तहत ग्राम सभाओं को कई अधिकार दिए गए हैं। ऐसे में यदि एक समान कानून लागू किया जाता है तो आदिवासियों के पारंपरिक अधिकार कैसे सुरक्षित रहेंगे, यह बड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई ऐसी जनजातियां हैं जिन्हें राष्ट्रपति की ओर से विशेष संरक्षण प्राप्त है। यूसीसी लागू होने पर उनके अधिकारों के प्रभावित होने की आशंका है। बैज ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जल, जंगल और जमीन को बेचने का काम कर रही है और अपने चहेते उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह के फैसले लिए जा रहे हैं।
पीसीसी चीफ ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीन खरीदने का अधिकार सिर्फ आदिवासियों को है, लेकिन सरकार ऐसे कदम उठा रही है जिससे आदिवासी अधिकार कमजोर हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के चारों तरफ असंतोष का माहौल है और सरकार राज्य को उजाड़ने की दिशा में काम कर रही है। बैज ने कहा कि कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी और संविधान के तहत सभी समुदायों को मिले अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
महिला आरक्षण पर क्या बोले बैज?
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से इस बिल की समर्थक रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय ही महिला आरक्षण का प्रस्ताव लाया गया था और पार्टी लगातार इसके पक्ष में रही है।
बैज ने कहा कि फिलहाल देश में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है और इसके बाद महिला आरक्षण बिल को लागू करने से पहले परिसीमन की प्रक्रिया भी पूरी होनी है। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि परिसीमन किस आधार पर किया जाएगा, उसके बाद ही महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।










