जाति उन्मूलन आंदोलन ने 14 अप्रैल को ‘जाति उन्मूलन दिवस’ मनाने का आह्वान किया, अम्बेडकर के भगवाकरण का विरोध

रायपुर। जाति उन्मूलन आंदोलन (CAM) ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती 14 अप्रैल को ‘जाति उन्मूलन दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है। संगठन ने आरएसएस और मोदी सरकार पर अम्बेडकरवादी विचारों को ‘भगवाकरण’ करने और बाबासाहेब को हिंदुत्व की छवि में ढालने की कोशिश का तीखा विरोध जताया है। सीएएम ने आरोप लगाया कि ‘अंबेडकर पंचतीर्थ’ परियोजना, दिल्ली में अंबेडकर फाउंडेशन की स्थापना और आरएसएस द्वारा अम्बेडकर को हिंदूराष्ट्र का समर्थक बताने वाले साहित्य का प्रचार, दलितों-उत्पीड़ितों को हिंदुत्व के दायरे में खींचने की सुविचारित रणनीति है।

संगठन ने याद दिलाया कि जब अम्बेडकर संविधान बना रहे थे, तब आरएसएस मनुस्मृति को संविधान बनाने की वकालत कर रहा था।जाति उन्मूलन आंदोलन ने सभी प्रगतिशील, लोकतांत्रिक ताकतों, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और उत्पीड़ित वर्गों से अपील की है कि वे 14 अप्रैल को इस ‘षड्यंत्र’ का पर्दाफाश और विरोध करें। संगठन ने जाति जनगणना, निजी क्षेत्र में जाति आरक्षण, भूमि वितरण और शिक्षा में भगवाकरण रोकने समेत कई प्रमुख मांगें भी रखी हैं।

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