यूपी में गैंगरेप के मामलों की फाइल गायब, सुप्रीम कोर्ट नाराज

NCERT


नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में दो बलात्कार से जुड़े मामलों की फाइलें गायब होने पर गंभीर कदम उठाया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने रायबरेली के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज को जांच का आदेश दिया है कि क्या ये फाइलें जानबूझकर गायब की गईं या यह महज मानवीय गलती थी।

गौरतलब है कि इन मामलों में एसिड अटैक और गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, लेकिन उन्हें कभी दस्तावेज नहीं दिए गए। फाइलें लंबे समय से गायब बताई जा रही थीं, जिससे न्याय मिलना मुश्किल हो रहा था।

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रायबरेली के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज से रिपोर्ट मांगी कि क्या रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। जनवरी 2026 में कोर्ट ने फाइलों को दोबारा बनाने (रिकंस्ट्रक्ट) का आदेश दिया। जब मामला फिर सुनवाई के लिए आया तो उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एडवोकेट शौर्य सहाय ने बताया कि फाइलें मिल गई हैं।

इस पर जस्टिस दत्ता ने सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वर्षों से पीड़िता फाइलें मांग रही थी और रो-रोकर गुहार लगा रही थी कि फाइल नहीं मिल रही। लेकिन कोर्ट के दखल और रिकंस्ट्रक्शन के आदेश के बाद ही फाइलें अचानक सामने आ गईं। जस्टिस दत्ता ने पूछा कि इतने सालों तक कहां थीं ये फाइलें? क्या यह न्याय में रुकावट डालने की सोची-समझी कोशिश थी?

कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि रिकॉर्ड गायब होने का कारण जांचा जाए। क्या यह न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने की मंशा से हुआ या सिर्फ लापरवाही? रायबरेली के डिस्ट्रिक्ट जज को छह हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।

पीड़िताओं की वकील प्रगति नीखरा ने बताया कि ऐसे कई मामले हैं जहां फाइलें गायब हो जाती हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी सभी घटनाओं की लिस्ट दी जाए, ताकि उन पर भी स्टेटस रिपोर्ट मांगी जा सके। गौरतलब है कि NCERT की किताब ने न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर मौजूद अध्याय पर महज 24घंटे पहले सीजेआई ने सख्त टिप्पणी की थी।

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