देश भर के करीब 30 करोड़ मजदूर और कर्मचारी आज रहेंगे हड़ताल पर

Workers’ Strike

नईदिल्ली। केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ देशभर के मजदूर और कर्मचारी देशभर में 12 फरवरी को आम हड़ताल (Workers’ Strike) करेंगे। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र संघों के संयुक्त मंच ने 9 जनवरी को आयोजित श्रमिक राष्ट्रीय सम्मेलन में इस हड़ताल का आह्वान किया था।

इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा भी पूर्ण समर्थन दे रहा है। किसान संगठन भी ट्रेड यूनियनों की मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन और जन आंदोलनों में शामिल हैं।

ट्रेड यूनियंस के अनुसार सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों, औद्योगिक क्षेत्रों सहित लगभग सभी क्षेत्रों में हड़ताल हो रही है। औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र, ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर जन आंदोलन भी हो रहे हैं।

क्याें हो रही है यह हड़ताल?

ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि यह हड़ताल ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार ने ट्रेड यूनियनों को कमजोर करने और श्रमिक आंदोलन को निहत्था करने के उद्देश्य से चार श्रम संहिताएं और उनके नियम अधिसूचित किए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन श्रम संहिताओं को बिना उचित विधायी प्रक्रिया, बिना हितधारकों से परामर्श और भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाए बिना लागू किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का खुला उल्लंघन है। कोविड-19 महामारी के दौरान, जब विरोध प्रदर्शनों पर रोक थी, तब इन कानूनों को संसद में जबरन पारित किया गया।

संयुक्त मंच का कहना है कि ये श्रम संहिताएं सामूहिक सौदेबाजी को खत्म करने और हड़ताल के अधिकार को छीनने के लिए लाई गई हैं। इनके लागू होने से लगभग 70 प्रतिशत कारखाने श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे श्रमिक नियोक्ताओं की दया पर निर्भर हो जाएंगे। व्यावसायिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और वेतन सुरक्षा जैसे अधिकार लगभग समाप्त हो जाएंगे।

श्रमिक संगठनों का कहना है कि फासिस्ट आरएसएस–मोदी सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किया गया हालिया आर्थिक समझौता देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ गंभीर विश्वासघात है। संगठन का आरोप है कि इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी साम्राज्यवाद के दबाव में अपनी आर्थिक संप्रभुता गिरवी रख दी है।

बयान में कहा गया कि इस समझौते से अमेरिका को भारतीय उत्पादों पर शुल्क बढ़ाने का अधिकार मिल गया है, जबकि भारत में अमेरिकी उत्पादों को शुल्क-मुक्त प्रवेश दिया गया है।

संगठनों का कहना है कि इस नीति के चलते भारतीय उत्पादों की कीमतें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिर गई हैं, जबकि भारत में अमेरिकी उत्पादों के लिए बड़े बाजार और ऊंचे मुनाफे की गारंटी सुनिश्चित की गई है। संगठन ने इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक स्थिति बताते हुए कहा कि इसका सीधा असर मजदूरों और किसानों पर पड़ रहा है।

ट्रेड यूनियंस की संयुक्त मोर्चा ने बताया कि अमेरिकी साम्राज्यवाद के प्रति मोदी सरकार द्वारा किए गए इस समझौते का बोझ मजदूर वर्ग और किसान वर्ग को उठाना पड़ रहा है। मजदूरों की मेहनत का अवमूल्यन हो रहा है, जबकि किसानों की उपज का दाम और बाजार दोनों खत्म किए जा रहे हैं। इससे देश में गंभीर आर्थिक अस्थिरता पैदा हो रही है और मेहनतकश वर्ग गहरे संकट में फंसा हुआ है।

बयान में यह भी कहा गया कि देश के अधिकांश हिस्सों में मजदूर पहले से ही न्यूनतम मजदूरी, रोजगार की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में केंद्र सरकार द्वारा कॉरपोरेट समर्थक चार नए श्रम कानूनों को लागू कर मजदूरों पर बड़ा हमला किया जा रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को समाप्त करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने का आरोप लगाया गया है।

मौजूदा परिस्थितियों में 12 फरवरी की अखिल भारतीय हड़ताल को धुर दक्षिणपंथी और गरीब-विरोधी मोदी सरकार की किसान–मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन में बदलना समय की मांग है।

संगठन ने कहा कि मेहनतकश वर्ग की पूर्ण विजय तक यह संघर्ष जारी रहना चाहिए। देश के सभी मजदूरों, किसानों, प्रगतिशील संगठनों और लोकतांत्रिक शक्तियों से अपील की है कि वे 12 फरवरी की हड़ताल में सक्रिय भागीदारी करें और मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ मजबूत प्रतिरोध दर्ज कराएं।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 13 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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