रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा (CG Vidhan Sabha) में गुरुवार को एक विशेष एकदिवसीय सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ा शासकीय संकल्प पेश करना था। सत्र की शुरुआत ही हंगामे और तीखी बहस के साथ हुई।
सत्र में महिला विधायकों को विशेष रूप से सभापति तालिका में शामिल किया गया। सत्ता पक्ष की ओर से लता उसेंडी और विपक्ष की ओर से अनिला भेड़िया को सभापति तालिका में नामित किया गया। इसके लिए सदन के नियम 9(1) को अस्थायी रूप से शिथिल किया गया। महिला विधायकों के आसंदी में बैठने पर पक्ष विपक्ष सभी विधायकों ने स्वागत किया । दरअसल सभापति तालिका में वरिष्ठ सदस्य ही शामिल किए जाते हैं लेकिन इस विशेष सत्र में अन्य वरिष्ठ सदस्यों के होते हुए भी इन दो महिला सदस्यों को स्थान दिया गया । इसे नारी सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में बताया गया।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब सदन में राजनीति में महिला आरक्षण संबंधी मुद्दों और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा कर रहा था। लता उसेंडी और अनिला भेड़िया दोनों ही अपने क्षेत्रों में सक्रिय और अनुभवी विधायक मानी जाती हैं।
सत्र शुरू होते ही सदन ने पूर्व विधायक जगेश्वर राम भगत और पूर्व राज्यसभा सांसद मोहसिना किदवई के निधन पर शोक व्यक्त किया। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शासकीय संकल्प पेश करते हुए कहा कि संसद के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई यानी 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सदन ने 4 घंटे का समय निर्धारित किया।
दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने अपना अशासकीय संकल्प पेश करने का प्रयास किया, जिसे स्पीकर ने खारिज कर दिया। इस पर विपक्ष ने तेज विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष महिलाओं के मुद्दे पर जनता को भ्रमित कर रहा है। विपक्ष का कहना था कि पहले निंदा प्रस्ताव की बात की गई, अब संकल्प लाया जा रहा है।
बीजेपी की महिला विधायक लता उसेंडी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक में बाधा विपक्ष ने ही डाली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में बिल को गिराने की कोशिश के पीछे विपक्ष जिम्मेदार था।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने भी कांग्रेस पर तंज कसते हुए उसके पुराने वादों की याद दिलाई।
जवाब में कांग्रेस की विधायक अनिला भेड़िया ने महिला आरक्षण बिल को “चुनावी झुनझुना” करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 33 प्रतिशत आरक्षण की समर्थक है, लेकिन इसे मौजूदा सीटों पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए। अनिला भेड़िया ने भाजपा पर महिलाओं के मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस विधायक संगिता सिन्हा ने कहा कि जब पूरे देश में चुनाव नजदीक आ रहे हैं तभी मोदी सरकार अचानक 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की घोषणा कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएं समझदार हैं और इस बहकावे में नहीं आने वालीं। संगिता सिन्हा ने मांग की कि सबसे पहले देशभर में जनगणना कराई जाए, उसके बाद ही महिला आरक्षण बिल को लागू किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के डर से ही यह बिल लाया जा रहा है।
कांग्रेस विधायक अनिला भेड़िया ने महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाते हुए भाजपा मंत्रियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल महज एक चुनावी झुनझुना है। 2023 में बिल पास होने के बावजूद इसे अब तक लागू नहीं किया गया। अनिला भेड़िया ने प्रधानमंत्री के आदेश पर मजबूरी में विशेष सत्र बुलाए जाने का भी आरोप लगाया। बहस के दौरान अनिला भेड़िया ने कहा, ‘जब मणिपुर जल रहा था तब ये लोग कहाँ थे? उन्नाव की महिला सड़क पर घूम रही थी तो प्रधानमंत्री ने मुंह पर टेप लगा लिया था। प्रदेश में तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ, तब मुख्यमंत्री ने क्या टेप लगा लिया था? किस मुंह से आप महिला अधिकारों की बात कर रहे हैं?’ सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि जब महिलाओं का सामूहिक मुंडन किया गया था, तब कांग्रेस कहाँ थी?
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में महिलाओं को 500 रुपये देने का वादा किया था, आज उसी कांग्रेस के लोग महिला अधिकारों की बात कर रहे हैं। इस दौरान सदन में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने दावा किया कि कांग्रेस ने महिलाओं को सबसे ज्यादा अवसर दिए हैं। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के 54 विधायकों में सिर्फ 8 महिलाएं हैं, जबकि कांग्रेस के 35 विधायकों में 11 महिलाएं हैं।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस ने कभी महिलाओं की स्थिति पर गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने याद दिलाया कि अंबेडकर के साथ कांग्रेस ने कैसा व्यवहार किया, यह सब जानते हैं। चंद्राकर ने गर्व से कहा कि छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य है, जहां भाजपा सरकार ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इस विशेष सत्र में प्रदेश भर की निगम, पालिका और पंचायतों से 500 से अधिक महिला जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था, जो चर्चा में शामिल हुईं।










