मराठी नहीं आई तो छिन जाएगी लाइसेंस? महाराष्ट्र के 9.65 लाख ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर लटकी तलवार, बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई PIL

लेंस न्यूज । महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा (Marathi)अनिवार्य किए जाने के फैसले ने विवाद का नया अध्याय खोल दिया है। इस नियम के खिलाफ मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कदम लाखों गरीब और प्रवासी ड्राइवरों की आजीविका छीन सकता है।

क्या है पूरा मामला?

महाराष्ट्र सरकार ने 12 अगस्त 2026 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें ऑटो रिक्शा, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद 20 अगस्त से परिवहन विभाग ने पूरे राज्य में चालकों के मराठी ज्ञान की जांच का अभियान शुरू कर दिया। कई जगहों पर टेस्ट भी हो रहे हैं, जिसमें कुछ ड्राइवर फेल भी हो रहे हैं।

इस फैसले के विरोध में मंगलवार को अधिवक्ता विवेक शुक्ला के माध्यम से बॉम्बे हाई कोर्ट में PIL दायर की गई। याचिका में कहा गया है कि यह नियम न सिर्फ अनुचित है, बल्कि कानूनी रूप से भी टिकाऊ नहीं है।

याचिका में क्या-क्या तर्क दिए गए?

याचिकाकर्ताओं में मोहम्मद कासिम अहमद समेत चार ऐप-आधारित कैब चालक शामिल हैं। उन्होंने कोर्ट में निम्नलिखित मुख्य बिंदु रखे हैं:

  • यह नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (आजीविका और व्यवसाय की स्वतंत्रता) तथा अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
  • मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए किसी भी भाषा के ज्ञान को अनिवार्य नहीं किया गया है। इसलिए राज्य सरकार का यह कदम केंद्रीय कानून के खिलाफ है।
  • राज्य में करीब 9.65 लाख वाणिज्यिक वाहन चालक हैं। इनमें बड़ी संख्या में अन्य राज्यों से आए प्रवासी ड्राइवर शामिल हैं, जो हिंदी या अपनी मातृभाषा बोलते हैं। मराठी न आने पर उनके बैज निलंबित किए जा सकते हैं और परमिट रद्द हो सकते हैं।
  • इससे गरीब परिवारों की रोजी-रोटी पर गंभीर संकट आ जाएगा।

याचिका में अधिसूचना पर तत्काल रोक लगाने और ड्राइवरों के हितों की रक्षा करने की मांग की गई है।

कोर्ट में आगे क्या होगा?

मामले को तत्काल निर्देशों के लिए बुधवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) रविंद्र घुगे की पीठ के समक्ष मेंशन किया जाएगा। हालांकि, जस्टिस घुगे को हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित किए जाने की सिफारिश की गई है और उन्होंने पहले यह भी कहा था कि उनकी पीठ नए मामले नहीं सुनेगी। ऐसे में कोर्ट का रुख क्या रहेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

मुख्यमंत्री का क्या कहना है?

इस विवाद पर सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपना रुख साफ किया था। उन्होंने कहा था, चालकों को मराठी का विशेषज्ञ बनाने का कोई कारण नहीं है। उन्हें सिर्फ कामकाज से संबंधित बुनियादी मराठी आनी चाहिए।” सीएम के इस बयान के बावजूद विभाग स्तर पर जांच अभियान जारी है, जिससे ड्राइवरों में डर बना हुआ है।

ड्राइवरों में क्यों है इतना गुस्सा?

कई ड्राइवर संगठनों का कहना है कि यह नियम भाषा के नाम पर उनके खिलाफ कार्रवाई का बहाना बन सकता है। पहले भी गैर-मराठी ड्राइवरों ने विरोध प्रदर्शन किए थे और काम बंद रखा था। उनका आरोप है कि राजनीतिक मकसद से यह अभियान चलाया जा रहा है। वहीं सरकार का पक्ष है कि स्थानीय भाषा जानने से यात्रियों को सुविधा होगी और संचार बेहतर होगा।

अब सबकी नजरें बॉम्बे हाई कोर्ट पर टिकी हैं। क्या कोर्ट इस अधिसूचना पर रोक लगाएगा या सरकार के पक्ष में फैसला आएगा? लाखों ड्राइवरों का भविष्य इस एक याचिका पर टिका हुआ है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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