नई दिल्ली। IIT दिल्ली के छात्र ऋषिकेश (Rishikesh)कुमार की कथित आत्महत्या के बाद आईआईटी-दिल्ली में शुरू हुआ छात्रों का विरोध-प्रदर्शन लगतार जारी है। 31 वर्षीय कुमार एमएससी भौतिकी के छात्र थे। छात्रों का गुस्सा लगातार बना हुआ है। वे संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे, कुमार की मौत की स्वतंत्र जांच और उनके परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
इस बीच, परिसर के कई हिस्सों को घेरकर आवाजाही सीमित कर दी गई और सेमिनार हॉल में सभी संकाय सदस्यों की बैठक बुलाई गई।छात्र खास तौर पर छात्र कल्याण के एसोसिएट डीन प्रोफेसर श्रीदेवी उपाध्यायुला के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
आईआईटी-दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने अब तक इस मांग को स्वीकार नहीं किया है। छात्रों ने डीन, एसोसिएट डीन छात्र कल्याण, एसोसिएट डीन छात्रावास प्रबंधन और भौतिकी विभाग के प्रमुख के इस्तीफे की भी मांग की है। इसके अलावा वे कुमार की मौत की स्वतंत्र जांच और उनके परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
छात्रों का दावा है कि 2023 के बाद से परिसर में आत्महत्या की यह आठवीं घटना है। रात तक प्रदर्शन जारी रहने के दौरान परिसर के कई हिस्सों में बैरिकेड लगाए गए और इमारतों तथा गलियारों में आवाजाही सीमित कर दी गई। छात्रों का कहना है कि परिसर के एक कैफे वाले हिस्से को भी बैरिकेड से बंद कर दिया गया था। गलियारों से गुजरने वाले लोगों से पहचान पत्र दिखाने को कहा जा रहा था। छात्रों ने बुधवार सुबह 8:30 बजे लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के सामने फिर बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
आईआईटी-दिल्ली देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल है और परिसर में इस स्तर का विरोध असामान्य माना जा रहा है। मंगलवार सुबह लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में 500 से अधिक छात्र जुटे थे, जबकि करीब 2,000 छात्र इसके बाहर मौजूद थे।छात्रों ने पिछली रात परिसर में कैंडल मार्च निकाला और रातभर प्रदर्शन किया। सुबह भी उनका आंदोलन जारी रहा। लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स के गेटों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
सुरक्षा कर्मियों को तकनीकी कर्मचारियों, अभिभावकों, छात्रों के परिवार के सदस्यों और अन्य आगंतुकों को अंदर जाने से रोकने के निर्देश दिए गए थे।संस्थान के प्रशासन ने अब तक एक बाहरी जांच समिति बनाने, अपने कल्याणकारी कोष से आर्थिक मदद देने और छात्रों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों की स्वैच्छिक आर्थिक सहायता के लिए एक अलग कोष बनाने की पेशकश की है। हालांकि, प्रशासन ने छात्रों की इस्तीफे और तय मुआवजे की मांगों पर सहमति नहीं दी है।
सोमवार देर रात हुई बैठक में छात्रों ने प्रशासन के इस जवाब को “अपर्याप्त और टालमटोल वाला” बताते हुए खारिज कर दिया और प्रदर्शन जारी रखने के पक्ष में मतदान किया। छात्रों ने पांच सदस्यीय जांच समिति में उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अतीत में अशोक कुमार छात्र प्रदर्शनों को “कट्टरपंथ की ओर बढ़ने” से जोड़कर टिप्पणी कर चुके हैं। छात्रों ने मांग की है कि जांच समिति की अध्यक्षता इसके बजाय सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को दी जाए।
निदेशक रंगन बनर्जी ने कहा है कि जांच समिति इस दुखद घटना की ओर ले जाने वाली परिस्थितियों की जांच करेगी और दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। उन्होंने कहा है कि संस्थान कुमार के परिवार के इलाज पर हुए खर्च की भरपाई करेगा। इसके अलावा परिवार को कल्याणकारी कोष से सहायता दी जाएगी। लंबित शिकायतों के समाधान के लिए बाहर से एक लोकपाल नियुक्त किया जाएगा और छात्रों को अतिरिक्त सहायता देने के लिए शिक्षकों के साथ उनकी मेंटर के रूप में जोड़ी बनाने की व्यवस्था शुरू की जाएगी।हालांकि, छात्रों ने मेंटर व्यवस्था के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें इसके बजाय “साथियों तक पहुंच, पढ़ाई के समान और निष्पक्ष अवसर तथा ऐसा परिसर चाहिए, जहां सहयोग और संवेदनशीलता हो।
बनर्जी के मुताबिक, कुमार ने जुलाई 2025 में एमएससी भौतिकी के पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था और शिवालिक छात्रावास में रह रहे थे। पहले सेमेस्टर में उनका शैक्षणिक प्रदर्शन अच्छा था। मार्च 2026 में उन्हें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का पता चला था। इसके बाद संस्थान के काउंसलर और मनोचिकित्सक ने उन्हें लगातार माता-पिता की निगरानी में रहने की सलाह दी थी।उस सेमेस्टर से नाम वापस लेने का उनका अनुरोध मंजूर कर लिया गया था और वह परिसर से बाहर जाकर अपने एक अभिभावक के साथ रहने लगे थे।
जुलाई में परिसर लौटने के बाद ऋषिकेश के चिकित्सा संबंधी रिकॉर्ड की फिर से समीक्षा की गई। इसके बाद भी उन्हें माता-पिता की निगरानी में रहने की सलाह दी गई थी। उनकी मृत्यु के समय वह परिसर से बाहर अपनी मां के साथ रह रहे थे। इस बीच, मौजूदा सेमेस्टर से नाम वापस लेने का उनका अनुरोध भी भौतिकी विभाग ने मंजूर कर लिया था।










