नई दिल्ली। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार कानून द्वारा गारंटीशुदा है और ऐसे आंदोलनों पर पुलिस की ज्यादतियां जायज नहीं ठहराई जा सकतीं। Supreme Court ने सोमवार को मौखिक रूप से यह टिप्पणी की।
सीजेआई सूर्यकांत तथा न्यायाधीश जॉयमलया बागची और वी. मोहना की पीठ ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है, जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार पूर्ण रूप से गारंटीशुदा है। इसे नकारा नहीं जा सकता। सीजेआई ने कहा कि मात्र आंदोलन होने से पुलिस की ज्यादती जायज नहीं हो सकती।
एक याचिका की सुनवाई करते हुये सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे प्रदर्शनों के दौरान स्वयं विकसित अनुशासन की आवश्यकता होती है। मात्र आंदोलन होने से लाठीचार्ज नहीं होना चाहिए। स्वयं विकसित अनुशासन जरूरी है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।
न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए अखिल भारतीय दिशानिर्देश मांगे गए थे।ये याचिकाएं दिल्ली के जंतर मंतर और बिहार में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा हाल ही में बल प्रयोग के आलोक में दायर की गई थीं।
एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता फौजिया शकील ने कहा कि बिहार बंद के दौरान सिवान में सुरक्षा बलों ने एके-47 ऑटोमैटिक गन का इस्तेमाल किया।कल एके-47 का इस्तेमाल हुआ।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह, जो एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए, ने भी इसी तरह की चिंताएं जताईं। विकास सिंह ने कहा कि बिहार में छात्रों पर भी कई हमले हुए। अखिल भारतीय आदेश की जरूरत है।
एक अन्य वकील ने सुरक्षा और पुलिस कर्मियों की दुर्दशा को भी उजागर करने की कोशिश की, जिन्हें ऐसे प्रदर्शनों के दौरान चोटें आईं। वकील ने कहा, ‘माई लॉर्ड, पुलिस अधिकारियों को भी लिंच किया गया! हमें भी सुना जाए।’
न्यायाधीश बागची ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है, चाहे वे कोई भी हो। एक प्रोटोकॉल होना चाहिए। उचित जगह हो और कोई प्रतिबंध न हो। लेकिन अगर कोई असामाजिक तत्व आदि हों तो उनका ध्यान रखा जा सकता है। यह सिर्फ दिल्ली का सवाल नहीं है। प्रोटोकॉल की एकरूपता जरूरी है,” सीजेआई ने टिप्पणी की।
न्यायालय ने अंततः निर्देश दिया कि इस मुद्दे से संबंधित सभी याचिकाओं की सुनवाई मंगलवार, 28 जुलाई को की जाए।दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन 25 जुलाई को समाप्त कर दिए गए थे, जब केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
ये प्रदर्शन जून में ऑनलाइन समूह कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर शुरू हुए थे, जो बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ और प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के शामिल होने और समर्थन में भूख हड़ताल शुरू करने के बाद प्रदर्शनों ने जोर पकड़ा। वांगचुक को बाद में प्रदर्शन स्थल से हटाकर दिल्ली पुलिस ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए अस्पताल ले जाया। उन्होंने 23 जुलाई देर रात मेदांता अस्पताल में अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त की।
इस बीच जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी रहे, जिसका समापन 20 जुलाई को संसद की ओर ‘संसद चलो’ मार्च के आह्वान में हुआ। पुलिस ने चेतावनी दी कि मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है।
20 जुलाई को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जमा होने के बाद झड़पें हुईं और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस इस्तेमाल और हिंसक कार्रवाई के आरोप सामने आए।
धर्मेंद्र प्रधान ने अंततः 25 जुलाई को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और प्रदर्शन समाप्त कर दिए गए।
बिहार में भी इसी तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई ने आंदोलनकारियों और उनके समर्थकों में व्यापक असंतोष पैदा किया है।










