नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC ने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और असमानता को जड़ से मिटाने और समानता को बढ़ावा देने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता का संवर्धन विनियम, 2026 लागू किया है। 15 जनवरी 2026 से प्रभावी हुए ये नए नियम 2012 के पुराने दिशानिर्देशों का स्थान लेंगे। इन नियमों को लेकर देश भर में बवाल शुरू हो गया है। भाजपा में इस्तीफों की बाढ़ हुई है।
यूजीसी के इन नए नियमों का प्राथमिक उद्देश्य अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ अब अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांग छात्रों को भी भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करना है।
समान अवसर केंद्र : प्रत्येक कॉलेज और विश्वविद्यालय के लिए अब से ‘इक्विटी कमेटी’ के साथ एक समान अवसर केंद्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।
अति पिछड़ों को भी शामिल : पहली बार कैंपस में भेदभावों को खत्म करने के लिए नियमों के दायरे में ओबीसी वर्ग को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
शिकायत निवारण तंत्र: संस्थानों को एक 24-घंटे चलने वाली इक्विटी हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल शुरू करना होगा।
समयबद्ध जांच: किसी भी शिकायत पर कमेटी को 24 घंटे के भीतर बैठक करनी होगी और एक निश्चित समय सीमा में रिपोर्ट सौंपनी होगी।
इक्विटी स्क्वाड और एंबेसडर: कैंपस में निगरानी के लिए ‘इक्विटी स्क्वाड’ और हॉस्टल व विभागों में ‘इक्विटी एंबेसडर’ नियुक्त किए जाएंगे, नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ यूजीसी सख्त रुख अपनाएगा।
दोषी पाए जाने पर संस्थानों को:यूजीसी की अनुदान योजनाओं से बाहर किया जा सकता है।डिग्री या ऑनलाइन कोर्स संचालित करने से रोका जा सकता है।गंभीर मामलों में संस्थान की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।










