ट्रंप का टैरिफ अवैध, US Supreme Court से झटका, रद्द की टैरिफ नीति, राष्ट्रपति ने बताया शर्मनाक फैसला

February 20, 2026 11:29 PM
US Supreme Court


नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तगड़ा झटका लगा है। US Supreme Court ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को रद्द कर दिया, जो राष्ट्रपति की प्रमुख आर्थिक नीति को एक बड़ा झटका है। ट्रंप ने इस फैसले का शर्मनाक बताया है। ट्रंप प्रशासन ने इस फैसले के खिलाफ वैकल्पिक रणनीति यानी बैकअप प्लान लागू करने की बात कही है।

कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि जिन कानूनों के आधार पर ये आयात शुल्क लगाए गए थे, वे राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देते। यह फैसला ट्रंप के लिए बड़ा नुकसान है, जिन्होंने टैरिफ को अपनी प्रशासन की आर्थिक और विदेश नीति का केंद्रीय हिस्सा बनाया था और दावा किया था कि वे बिना कांग्रेस की मंजूरी के किसी भी देश पर कभी भी टैरिफ लगा सकते हैं।

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कोर्ट की राय लिखी। जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कवानॉ ने असहमति जताई।फैसले में इस बात पर चुप्पी रही कि ऊंची दरों पर पहले चुकाए गए टैरिफ की राशि वापस करनी होगी या नहीं।

भारत ने इसी वजह से की ट्रेड डील, विपक्ष ने कहा ब्लैकमेलिंग

महत्वपूर्ण है कि भारत के खिलाफ डोनाल्ड ट्रम्प ने 50 फीसदी टैरिफ लगाया था लेकिन भारत ने नई ट्रेड डील करके और कृषि समेत अन्य क्षेत्रों के अमेरिकी उत्पाद के आयात प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ साथ रूसी तेल न लेने का वादा करके टैरिफ को 18 फीसदी तक कम कर दिया था। अमेरिकी कोर्ट के फैसले पर भारत की प्रतिक्रिया की प्रतिक्षा है।

सभी देशों पर लगाया टैरिफ

व्हाइट हाउस में वापसी के बाद से ट्रंप ने अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे व्यापार संबंधों को तेजी से बदल दिया है, लगभग हर देश पर भारी आयात शुल्क लगाकर।इनमें से कई टैरिफ “इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट” की नई व्याख्या के जरिए लगाए गए थे। इनमें ट्रंप के लगभग वैश्विक “रेसिप्रोकल” टैरिफ और कथित तौर पर घातक ड्रग्स की तस्करी से जुड़े अलग शुल्क शामिल हैं।

पुराने एक्ट के दुरुपयोग का आरोप

एक्ट में स्पष्ट रूप से टैरिफ का जिक्र नहीं है, और शुक्रवार के फैसले में कोर्ट ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता। इसके बजाय, यह राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के बाद कुछ असामान्य और असाधारण खतरों से निपटने के लिए विदेशी संपत्ति लेनदेन और आयात को रेगुलेट करने की अनुमति देता है।ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया था कि इस भाषा से राष्ट्रपति को विदेशी सामानों पर टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता है।

कानून ने नहीं दी शक्ति

आलोचकों ने कहा कि कानून राष्ट्रपति को किसी भी समय, किसी भी देश पर किसी भी आकार के शुल्क लगाने की एकतरफा शक्ति नहीं देता। एक फेडरल ट्रेड कोर्ट और फेडरल अपील कोर्ट ने भी ट्रंप के IEEPA टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।पिछले साल अमेरिकी टैरिफ राजस्व का अधिकांश हिस्सा टैरिफ आधारित शुल्कों से आया था।

ट्रंप ने मनाया था लिब्रेशन डे

ट्रंप ने अप्रैल में व्हाइट हाउस में एक बड़े आयोजन में अपनी व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ योजनाओं का ऐलान किया था, जिसे उन्होंने अमेरिका का “लिबरेशन डे” कहा था।इस घोषणा से बाजार में अचानक घबराहट फैली, और टैरिफ को जल्दी ही रोक दिया गया। उसके बाद इन्हें बार-बार संशोधित, टाला और फिर लागू किया गया, जिससे प्रशासन की जटिल व्यापार नीतियों में और उलझन बढ़ी।

फ्री ट्रेड पर लगी पाबंदी

इस टैरिफ में मैक्सिको, कनाडा और चीन पर लगाए गए शुल्क शामिल हैं, जो इन देशों पर फेंटेनिल जैसे घातक ड्रग्स को अमेरिका में आने देने का आरोप लगाते हैं।ट्रंप, जो हाल के वर्षों में अमेरिका के फ्री-ट्रेड समझौतों के कट्टर आलोचक रहे हैं, ने टैरिफ को संघीय राजस्व का बड़ा स्रोत और विदेशी भागीदारों/प्रतिद्वंद्वियों के साथ बातचीत का प्रमुख हथियार बताया है।उन्होंने दावा किया है कि टैरिफ का खर्च विदेशी देश उठाते हैं और अमेरिकियों के लिए ऊंची कीमतों की चिंताओं को कम करके आंका है। हालांकि, उनके प्रशासन ने स्वीकार किया है कि ये शुल्क अमेरिकी आयातकों द्वारा चुकाए जाते हैं।

ट्रंप ने कहा था इनकम टैक्स से ज्यादा वसूली

ट्रंप ने कहा है कि टैरिफ से इतनी बड़ी आय हुई है कि इससे इनकम टैक्स की जगह ली जा सकती है। उन्होंने अमेरिकियों को $2,000 के टैरिफ डिविडेंड चेक भेजने का विचार भी रखा है।उन्होंने हाल ही में ट्रुथ सोशल पर लिखा कि हमने 600 अरब डॉलर से ज्यादा टैरिफ इकट्ठा किए हैं और जल्द ही और मिलेंगे।

ट्रंप ने जताया था डर

फैसले से पहले ट्रंप और उनके प्रशासन ने कोर्ट के खिलाफ फैसले के गंभीर परिणामों की बात की थी।ट्रंप ने 12 जनवरी को लिखा: “अगर सुप्रीम कोर्ट इस नेशनल सिक्योरिटी बोनान्जा पर अमेरिका के खिलाफ फैसला देता है, तो हम तबाह हो जाएंगे! ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट सहित अधिकारियों ने कहा था कि वे मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति की सिग्नेचर आर्थिक नीति को नहीं पलटेगा।

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