जंतर मंतर प्रदर्शन में शामिल होने पर यूपी पुलिस ने छात्र को थमा दिया 5 लाख का नोटिस, सीजेआई खफ़ा

नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षय त्रिपाठी को जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने पर 5 लाख रुपये का नोटिस देने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। CJI सूर्यकांत के सामने मामले का जिक्र किया गया। इस पर उन्होंने गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी से जवाब मांगने की बात कही।याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1 सितंबर के आदेश के बावजूद छात्र के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की गई। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना बताते हुए कहा कि इसका असर देशभर के छात्रों पर पड़ सकता है।

कलेक्टर नोएडा से मांगा जवाब

इस पर CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी से जवाब मांगेंगे।

किस आधार पर क्या था 5 लाख रुपये का नोटिस

पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर 4 सितंबर को अक्षय त्रिपाठी को कार्यकारी मजिस्ट्रेट, ग्रेटर नोएडा की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इसमें उनसे 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें देने को कहा गया था।4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा आयुक्तालय के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया था। यह कार्रवाई सहायक पुलिस आयुक्त की ओर से धारा 126 और 135 के तहत शुरू की गई कार्यवाही के बाद हुई।

नोटिस में कहा गया था कि त्रिपाठी छात्रों को सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे और ऐसी जानकारी प्रसारित कर रहे थे, जिससे तनाव या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। त्रिपाठी से पूछा गया था कि क्यों न उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने का आदेश दिया जाए। इसके लिए उनसे 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था।

मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।यह शांति बंधपत्र एक एहतियाती कार्रवाई होती है। इसे सजा या किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के तौर पर नहीं देखा जाता।पुलिस का आरोप था कि अक्षय छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे और कथित तौर पर ‘सरकार विरोधी और भ्रामक’ जानकारी फैला रहे थे। पुलिस ने इसे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था के लिए संभावित खतरा बताया था।हालांकि अक्षय ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया था।

उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में यह भी दावा किया कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के संसद की ओर बढ़ने के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हुए थे।

पुलिस ने बाद में नोटिस लिया वापस

पुलिस के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद 4 सितंबर को ही नोटिस वापस ले लिया गया था। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठाया गया कि जब अदालत ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था तो ऐसा नोटिस जारी ही कैसे हुआ।

CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने भी सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अक्षय त्रिपाठी को 5 लाख रुपये का बॉन्ड देने की जरूरत नहीं है और छात्रों को निशाना बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।वहीं स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने अक्षय के खिलाफ कार्रवाई को ‘दमनकारी’ बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस की आलोचना की।

छात्र ने आरोपों से किया इनकार

अक्षय त्रिपाठी ने पुलिस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया था। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में उन्होंने बताया कि उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं जा रहे थे क्योंकि संस्थान करीब तीन महीने से बंद था।त्रिपाठी ने यह भी दावा किया कि 20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे, तब दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हुए थे।

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिपाठी मूल रूप से प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं और फिलहाल ईकोटेक-1 इलाके में रहते हैं। पुलिस ने दावा किया था कि उनकी गतिविधियों से विश्वविद्यालय परिसर में तनाव का माहौल बना और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी।

SFI और CJP ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने छात्र के खिलाफ कार्रवाई को ‘दमनकारी’ बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस की आलोचना की। वहीं, सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि सीजेपी के प्रदर्शनों में शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से संरक्षण मिला हुआ है।

दास ने कहा कि केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति संबंधित जिलाधिकारी को भेजने और मामले में कार्रवाई करने की मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सीजेपी किसी छात्र को निशाना नहीं बनने देगी।

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