रायपुर। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग (Durg University) के कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने अपने खिलाफ की गई शिकायतों से जुड़े सभी मामलों में तथ्यात्मक जानकारी, संबंधित नोटशीट, नस्ती, कार्यादेश और आदेशों की छायाप्रतियों सहित करीब 850 पृष्ठों का जवाब लोकभवन को भेजा था। इसी जवाब में प्रस्तुत दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के लिए लोकभवन की जांच समिति 8 सितंबर को विश्वविद्यालय पहुंची। टीम में प्रो. वी.के. गोयल, राज्यपाल के सचिव सी.आर. प्रसन्ना, उप सचिव निधि साहू और अनुभव शर्मा शामिल थे।
विश्वविद्यालय पहुंची टीम ने कुलपति की ओर से लोकभवन को भेजे गए दस्तावेजों और उनके जवाब में प्रस्तुत अभिलेखों का भौतिक सत्यापन किया। टीम ने संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद संतुष्टि व्यक्त की और वापस लौट गई।
समिति की वैधानिकता पर सवाल
इस घटनाक्रम के बीच अब राज्यपाल द्वारा कुलपति के खिलाफ शिकायत की जांच के लिए गठित समिति की वैधानिकता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। समिति के गठन से लेकर उसके सदस्यों की भूमिका और पात्रता को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं।
जांच समिति के अध्यक्ष प्रो. वी.के. गोयल हैं, जो निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष हैं। वहीं राज्यपाल के सचिव सी.आर. प्रसन्ना समिति के सदस्य हैं। इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल के सचिव के हस्ताक्षर से हुई है।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिस व्यवस्था के तहत प्रो. गोयल की नियुक्ति हुई, उसी व्यवस्था से जुड़े अधिकारी का जांच समिति में सदस्य होना हितों के टकराव की स्थिति पैदा करता है। उनका कहना है कि समिति अध्यक्ष पर अपने नियोक्ता के प्रभाव का दबाव रहने की आशंका है, जिससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
विधि विशेषज्ञों की राय का हवाला देते हुए समिति को लेकर यह भी सवाल उठाया गया है कि ऐसी स्थिति में जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
कुलपति की जांच के लिए समिति में कौन हो सकता है सदस्य?
आपत्ति का एक महत्वपूर्ण आधार प्रो. वी.के. गोयल की पात्रता को भी बनाया गया है। दावा किया गया है कि प्रो. गोयल कभी कुलपति के पद पर नहीं रहे हैं। आपत्ति करने वालों का दावा है कि छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 में निहित प्रावधानों के अनुसार पदस्थ कुलपति की जांच के लिए गठित समिति में ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति पर सवाल उठता है, जो स्वयं कुलपति के पद पर नहीं रहा हो।
इसी तरह निधि साहू, जो उप सचिव स्तर की अधिकारी हैं, को भी समिति में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। दावा किया गया है कि उप सचिव स्तर के अधिकारी का पदस्थ कुलपति के खिलाफ गठित जांच समिति का सदस्य होना भी नियमों के अनुरूप नहीं है।









