रायपुर। हसदेव अरण्य में कोयला खदानों के आवंटन को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव (TS Singhdev) ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया है कि एनजीटी की रिपोर्ट में ‘नो-गो’ बताए गए तारा कोल ब्लॉक के आवंटन के साथ ही हसदेव की चार सीमावर्ती खदानों के जरिए 20 हजार एकड़ से अधिक जंगल और जमीन को कॉरपोरेट खनन के हवाले करने की तैयारी है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर हसदेव अरण्य के 23 कोल ब्लॉकों का नक्शा साझा करते हुए कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह हसदेव की सभी 23 खदानें अपने ‘पूंजीपति मित्रों’ को सौंपकर प्रदेश का भविष्य दांव पर लगाने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कि अंधाधुंध खनन का असर केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हसदेव नदी, मिनीमाता बांगो बांध और मध्य छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से की जल सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
हसदेव के 23 कोल ब्लॉक का नक्शा किया साझा
TS सिंहदेव ने लिखा कि प्रस्तावित खनन से हसदेव अरण्य के प्राचीन और सघन जंगलों के साथ-साथ ऐतिहासिक और श्रद्धेय रामगढ़ की पहाड़ी भी खतरे की जद में आ सकती है।
उन्होंने मिनीमाता बांगो बांध का जिक्र करते हुए कहा कि यह बांध मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों के खेतों की सिंचाई और लोगों की जल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक हसदेव नदी और इस बांध पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को नजरअंदाज करना पूरे क्षेत्र की जल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।
टीएस सिंहदेव ने जिस नक्शे को साझा किया है, उसमें हसदेव-अरण्य कोलफील्ड के 23 कोल ब्लॉक दिखाए गए हैं। एनजीटी में दाखिल दस्तावेज में भी हसदेव-अरण्य क्षेत्र के 23 ब्लॉकों की सूची दी गई है, जिसमें तारा, परसा, PEKB, कांटे एक्सटेंशन समेत अन्य ब्लॉक शामिल हैं।
केंद्र सरकार के दस्तावेजों के मुताबिक हसदेव-अरण्य कोलफील्ड करीब 1,878 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसमें बड़ी संख्या में गैर-कोल इंडिया कोल ब्लॉक शामिल हैं।









