नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ हुए हुई ट्रेड डील को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था पहले से पूरी तरह अलग है और अब भारत अमेरिका को टैरिफ देगा, जबकि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगाएगा। ट्रंप ने अमेरिकन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद दुनिया भर के देशों पर दस फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने कहा, “कुछ भी नहीं बदला है।भारत टैरिफ देगा और हम नहीं देंगे।” उन्होंने दावा किया कि पहले की प्रणाली में अमेरिका को नुकसान होता था, लेकिन अब समझौते को पलट दिया गया है।
ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत सराहना भी की। उन्होंने कहा कि मोदी एक शानदार और मजबूत नेता हैं, लेकिन पहले भारत अमेरिका के मुकाबले ज्यादा चतुराई से व्यापार कर रहा था। हालांकि उन्होंने जोड़ा कि अब यह व्यवस्था “फेयर डील” है।
सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट पर जताई आपत्ति
इसी बीच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के उस तर्क पर सवाल उठाए हैं, जिसमें कहा गया था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने पूर्व के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि टैरिफ जैसे असाधारण कदम उठाने के लिए राष्ट्रपति को स्पष्ट रूप से संसदीय मंजूरी दिखानी होगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति एकतरफा ऐसा कदम नहीं उठा सकते।
अदालत का मानना है कि IEEPA के तहत बिना कांग्रेस की अनुमति टैरिफ लगाना शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत का उल्लंघन हो सकता है। राज्यों और कारोबारियों ने दी थी चुनौती यह टिप्पणी उन कानूनी याचिकाओं के बाद आई है, जो टैरिफ से प्रभावित उद्योगों और 12 राज्यों ने दायर की थीं। इनमें अधिकतर राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी शासित बताए जाते हैं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना टैरिफ लागू कर अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ने की कोशिश की। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने व्यापार नीति और राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।










