ट्रंप का शांति बोर्ड फलस्तीनियों के जख्मों पर नमक रगड़ने जैसा, IPSN ने किया खुला विरोध

Trump board of peace

नई दिल्‍ली। भारत-फिलिस्तीन एकजुटता नेटवर्क (आईपीएसएन) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा और फिलिस्तीन के लिए गठित “बोर्ड ऑफ पीस” की कड़ी निंदा की है। संगठन का आरोप है कि यह पहल फिलिस्तीनी लोगों के घावों पर नमक छिड़कने के समान है और गाजा को धनकुबेरों के हवाले करने जैसी बेशर्म कोशिश लगती है।

आईपीएसएन ने जारी बयान में कहा कि ट्रंप ने खुद को इस बोर्ड का अध्यक्ष घोषित किया है, जबकि उनके दामाद जेरेड कुश्नर और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को प्रमुख सदस्य बनाया गया है। संगठन इसे फिलिस्तीनी बच्चों और महिलाओं के खिलाफ जारी युद्ध अपराधों को वैध ठहराने का प्रयास करार देता है।

बयान के अनुसार, यह बोर्ड पुनर्निर्माण और प्रशासन के नाम पर पेश किया जा रहा है, लेकिन वास्तव में यह गाजा को इजरायल के प्रभाव में लाने का माध्यम बन सकता है, जहां स्थानीय स्वायत्तता और फिलिस्तीनी अधिकारों की जगह बाहरी हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय, संयुक्त राष्ट्र की OCHA और UNRWA की रिपोर्टों का हवाला देते हुए आईपीएसएन ने बताया कि 7 अक्टूबर 2023 से अब तक कम से कम 72,437 फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है, 1,71,324 घायल हुए हैं और लगभग 19 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, जो गाजा की कुल आबादी का करीब 90 प्रतिशत है।

गाजा शहर समेत खान यूनिस और रफाह के बड़े हिस्से बमबारी से तबाह हो चुके हैं। आवास, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए हैं। बोर्ड की कार्यकारी समितियों में ट्रंप प्रशासन के सदस्य, कॉर्पोरेट हस्तियां और इजरायल से निकट संबंध वाले लोग शामिल हैं, जैसे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अपोलो ग्लोबल के सीईओ मार्क रोवन, वर्ल्ड बैंक अध्यक्ष अजय बंगा आदि।
एक अन्य समिति में कुश्नर, विटकॉफ, ब्लेयर, रोवन के अलावा तुर्की, कतर, मिस्र, यूएई के प्रतिनिधि और इजरायली व्यवसायी शामिल हैं। आईपीएसएन ने कुश्नर के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने गाजा के तटीय इलाकों को “विकास की संभावित जगह” बताया था और नागरिकों के अस्थायी स्थानांतरण का सुझाव दिया था। कई सदस्य रियल एस्टेट और निवेश से जुड़े हैं, जिससे संगठन को संदेह है कि यह पहल फिलिस्तीनी भूमि को व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की है।

आईपीएसएन का कहना है कि यह बोर्ड प्रतिबंध हटाने, अवैध बस्तियों पर रोक और फिलिस्तीनियों के आत्म-निर्णय जैसे मूल मुद्दों को हल करने के बजाय चुनिंदा सरकारों और इजरायल के साथ सहयोग पर केंद्रित है। संगठन ने मांग की है कि गाजा का पुनर्निर्माण फिलिस्तीनियों द्वारा तय और निर्देशित होना चाहिए, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समर्थन उनकी प्राथमिकताओं, कानूनी अधिकारों, शरणार्थियों की वापसी और सेवाओं का सम्मान करे।

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