रायपुर। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय (Chandrashekhar)की जन्मशती के अवसर पर राजधानी रायपुर के विमतारा सभागार में आयोजित संगोष्ठी में देशभर से आए विचारकों और समाजवादियों ने उनके व्यक्तित्व और विचारों को याद करते हुए लोकतंत्र, समाजवाद और नागरिक भागीदारी पर व्यापक चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा समय में चंद्रशेखर के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए संवाद, असहमति और वैचारिक राजनीति को बढ़ावा देना जरूरी है।
चंद्रशेखर जन्मशती समारोह समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व मंत्री रमाशंकर सिंह ने कहा कि हर सवाल का स्वागत होना चाहिए। उनके अनुसार चंद्रशेखर असहमति और विमर्श की राजनीति के बड़े नेता थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा नागरिक सहभागिता और असहमति के सम्मान में निहित है। साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि आज राजनीतिक दल अपने संगठन के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं करते, जबकि सार्वजनिक रूप से लोकतंत्र की बात करते हैं। उन्होंने समाजवाद की चंद्रशेखर की परिभाषा को याद करते हुए कहा कि समाजवाद का अर्थ “बराबरी और समृद्धि” है और आज की राजनीति में “विचार पीछे और नेता आगे” हो गए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आनंद जी ने कहा कि तानाशाही का विरोध वही प्रभावी ढंग से कर सकता है जिसने आपातकाल का विरोध किया हो। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर गंभीर विमर्श और तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से भावनाओं में बहने के बजाय तथ्यों के आधार पर सोच विकसित करने की अपील की।
चंद्रशेखर जन्मशती समारोह समिति के राष्ट्रीय संयोजक अरुण श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की शुरुआत में कहा कि किसी भी विचारधारा को जीवित रखने के लिए उसके विचारों का समाज तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने बताया कि समिति ने देशभर में चंद्रशेखर जन्मशती के अवसर पर 100 कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है, ताकि नई पीढ़ी को पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन, संघर्ष और वैचारिक योगदान से परिचित कराया जा सके।
संगोष्ठी में “विचार संवाद” सत्र के दौरान गौतम बंधोपाध्याय, एच.एस. मिश्रा, मनमोहन सिंह सैलानी, विनोद वर्मा, सुरेंद्र शर्मा, विनय सिंह और पद्मश्री मदन चौहान सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत चंद्रशेखर के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन से हुई। आयोजन का संचालन मनमोहन अग्रवाल ने किया।
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय लोकतंत्र, वैचारिक राजनीति और नागरिक चेतना को मजबूत करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका मानना था कि चंद्रशेखर के विचारों का व्यापक प्रसार लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।









