नई दिल्ली। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी के टीएमसी गुट के नेताओं ने रविवार को कोलकाता (Kolkata)में विरोध मार्च निकाला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के एक दफ्तर पर कब्जा कर लिया है। साथ ही दावा किया कि ममता गुट के टीएमसी पार्षदों, पार्टी सदस्यों और उनके घरों पर हमले किए गए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ममता गुट की नेता वसुंधरा गोस्वामी ने कहा कि पार्टी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं को लेकर पुलिस से संपर्क किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं की पिटाई की गई। गोस्वामी ने कहा, “हम चुनाव के बाद हुई हिंसा का मुद्दा उठाने के लिए पुलिस स्टेशन गए थे। हमारे लोगों की पिटाई की गई।”
ममता गुट के टीएमसी नेता बैसवानोर चट्टोपाध्याय ने बताया कि पार्टी अपने पार्षदों पर हुए हमलों के विरोध में रैली कर रही है। वे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पार्षदों पर हमला हुआ। हम इस घटना के विरोध में यह रैली निकाल रहे हैं। हम मांग करते हैं कि दोषियों को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।”
एक अन्य नेता मलय मजूमदार ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यालय पर हमला किया गया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी सदस्यों के घरों को भी निशाना बनाया गया। मजूमदार ने कहा, “हमारे पार्टी कार्यालय पर हमला हुआ। उन्होंने हमारे घरों पर भी हमला किया। इन हमलों के विरोध में हम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन कर रहे हैं।”
यह घटनाक्रम नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों से पहले सामने आया है। इन दोनों सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं। वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को निर्धारित है। टीएमसी के पार्टी नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद तथा उम्मीदवारों की स्थिति में बदलाव के बाद यह स्थिति बनी है।
2026 के विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भबानीपुर सीट बरकरार रखी थी। इसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हो गई थी। उन्होंने भबानीपुर में तत्कालीन टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को हराया था और नंदीग्राम सीट खाली कर दी थी। रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई। उन्होंने नौदा से भी जीत हासिल की थी।
इससे पहले ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करने का फैसला किया था। कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। बनर्जी ने कहा था कि यह निर्णय देश के व्यापक हित में लिया गया है और उन्होंने कांग्रेस को सहयोगी पार्टी बताया था।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है। उन्होंने पार्टी के अंदर चल रहे नेतृत्व विवाद के बीच चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनके गुट को असली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी का नाम और उसके पारंपरिक फूल और घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है।










