मुंबई में फोटोस्टेट दुकान पर मिले हजारों मुद्रित SIR फॉर्म


नई दिल्ली। नवी मुंबई के खारघर इलाके में शुक्रवार को एक फोटोकॉपी दुकान पर हजारों मुद्रित विशेष गहन संशोधन (SIR) फॉर्म मिलने का आरोप लगा है। इससे शिवसेना (UBT) और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की पवित्रता पर सवाल उठे।।
पुलिस के अनुसार, घटना तब हुई जब शिवसेना (UBT) कार्यकर्ताओं ने एक व्यक्ति का सामना किया, जिसे वे भाजपा युवा मोर्चा का पदाधिकारी बता रहे थे। वह कथित तौर पर दुकान पर SIR फॉर्म की फोटोकॉपी करवा रहा था।स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और कथित भाजपा पदाधिकारी को हिरासत में ले लिया।

परिसर से हजारों मुद्रित SIR फॉर्म जब्त कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया।हालांकि शिवसेना (UBT) कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हिरासत में लिया गया भाजपा युवा नेता पूछताछ के लिए लाए जाने के कुछ देर बाद ही खारघर पुलिस स्टेशन से भाग निकला।पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।स्थानीय शिवसेना (UBT) नेता बालेश भोजने ने मांग की कि इस बात की गहन जांच हो कि इतनी बड़ी मात्रा में आधिकारिक फॉर्म निजी हाथों में कैसे आए और उन्हें थोक में फोटोकॉपी क्यों किया जा रहा था।

एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने कहा कि इस घटना ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल भविष्य के चुनावों में जीत की नींव रखने के लिए कर रही है।

पवार ने कहा, “खारघर की घटना ने एक तरह से हमारी आशंकाओं की पुष्टि कर दी है कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।”उन्होंने बताया कि उन्होंने इस घटना पर राज्य चुनाव आयोग से जवाब मांगा था, लेकिन उन्हें बताया गया कि मामला भारत के चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है।उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्टों के अनुसार इस घटना के संबंध में चार बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) को निलंबित किया गया है, लेकिन सवाल किया कि क्या केवल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त होगी।

पवार ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “केवल BLO को निलंबित करना काफी नहीं है। जो अधिकारी उन्हें निर्देश देते हैं, उन्हें भी निलंबित किया जाना चाहिए और इसमें शामिल भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाएं अन्य जगहों पर भी हो सकती हैं और पकड़ में नहीं आ रही होंगी। उन्होंने चुनाव आयोग से जवाब मांगा।

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