द लेंस की खबर का असर, छत्तीसगढ़ सरकार ने Bonded विशेषज्ञ डॉक्टरों को दी बड़ी राहत

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने MD/MS योग्य bonded सरकारी डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब इन विशेषज्ञ डॉक्टरों को उनकी पढ़ाई वाली विशेषज्ञता के अनुसार ही पदस्थापना दी जाएगी। इस नए आदेश के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों Bonded Doctors को अब अनावश्यक रूप से कैजुअल्टी (इमरजेंसी), मेडिको-लीगल केस (MLC) या पोस्टमॉर्टम जैसी जनरल ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा। उन्हें उनके संबंधित विभाग (जैसे सर्जरी, मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स आदि) में ही काम करने का मौका मिलेगा जरूरत पड़ने पर वे ऑन-कॉल ड्यूटी पर उपलब्ध रहेंगे। द लेंस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुखता से खबर दिखाई थी।

देखें द लेंस की रिपोर्ट :

क्यों लिया गया यह फैसला?

स्वास्थ्य विभाग ने माना कि पहले की व्यवस्था में विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्किल्स का सही उपयोग नहीं हो पा रहा था। उनकी विशेषज्ञता का फायदा मरीजों को नहीं मिल रहा था, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। नई व्यवस्था में आपातकालीन और कैजुअल्टी सेवाओं की मुख्य जिम्मेदारी अब MBBS डॉक्टरों को सौंपी जाएगी। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर अपने क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे।

डॉक्टर संगठनों का स्वागत

छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन (CGDF) के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह और JDA छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह आदेश लंबे समय से उठ रही उनकी मांगों की पूर्ति है। इससे न सिर्फ डॉक्टरों के क्लिनिकल स्किल्स में सुधार होगा, बल्कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ इलाज मिल पाएगा।

डॉ. रेशम सिंह, अध्यक्ष JDA छत्तीसगढ़
डॉ. हीरा सिंह,अध्यक्ष CGDF

द लेंस की रिपोर्ट का असर

11 अप्रैल 2026 को ‘द लेंस’ ने “Bonded Doctors से मनमानी ड्यूटी या मरीजों की जान से खिलवाड़?” शीर्षक से विस्तृत रिपोर्ट दिखाई थी। रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों की खराब स्थिति, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, 55% पद खाली होने और bonded PG विशेषज्ञ डॉक्टरों को जबरन जनरल ड्यूटी कराए जाने जैसे मुद्दों को उठाया गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि पिछले दो साल में 100 से ज्यादा अनुभवी डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। कई मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर और उपकरणों की कमी के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों से इमरजेंसी और पोस्टमॉर्टम करवाए जा रहे थे। इस रिपोर्ट के बाद डॉक्टर समुदाय और स्वास्थ्य विभाग में चर्चा तेज हुई थी, जिसका नतीजा अब सरकार के इस बड़े फैसले के रूप में सामने आया है।

डॉक्टर संगठनों का कहना है कि यह फैसला न सिर्फ विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए राहत भरा है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। अभी यह देखना बाकी है कि नया आदेश कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू होता है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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