नई दिल्ली। सोन नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर यूपी, बिहार में नदी किनारे बसे इलाकों में चिंता बढ़ा दी है।सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में हैं। दरअसल मध्य प्रदेश के बाणसागर जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद सोन नदी में पानी का प्रवाह काफी बढ़ गया है। जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए इंद्रपुरी बराज और यूपी के रिहंद और ओबरा डैम पर भी दबाव बढ़ गया है।बराज के लगभग सभी 69 फाटकों को खोलकर सोन नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल करीब 5 लाख 12 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा है।
यूपी बिहार के जल बंटवारे पर अविरल खामोशी
सोन नदी में पानी की यह बढ़ोतरी आगे गंगा के जलस्तर को भी प्रभावित कर सकती है। बाणसागर बराज से दो रेडियल गेट खोले जाने के बाद सोन नदी में पानी का प्रवाह बढ़ गया जिसका असर यूपी के पूर्वांचल में भी पड़ा है और रिहंद एवं ओबरा डैम से पूर्ण क्षमता से उत्पादन करने के साथ साथ दोनों डैम के तीन तीन गेट खोल दिए गए हैं। दिलचस्प है कि यूपी, बिहार और झारखंड में तबाही मचा रही सोन नदी को लेकर केंद्र सरकार अपनी पीठ ख़ुद थपथपा रही है कि हमने झारखंड और बिहार में समझौता करा दिया है। नहीं भूलना चाहिए कि सोन नदी के जल का बँटवारा यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश में हुआ है। झारखंड और बिहार का विवाद नए राज्य के तौर पर झारखंड के अस्तित्व में आने के बाद हुआ है।लेकिन हर वर्ष आने वाली बाढ़, यूपी और बिहार के बीच के विवाद और सोन नदी पर बढ़ते दबाव को लेकर सभी ख़ामोश हैं।
कितना सच कितना झूठ
बिहार व झारखंड के बीच ढाई दशक से जारी सोन नदी के जल बंटवारे का विवाद अंततः सुलझा लिए जाने की बात सामने आ रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच सहमति बनने के बाद इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण के दावे किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि इंद्रपुरी जलाशय के निर्माण से बिहार और झारखंड दोनों राज्यों को बड़ा फायदा मिलेगा। इस परियोजना से बिहार के सात जिले रोहतास, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल व पटना तथा झारखंड के गढ़वा और पलामू जिलों की लाखों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का पानी उपलब्ध हो सकेगा।लेकिन क्या ऐसा सच में होगा?
असल संकट क्या है? आइए जानें
बिहार और झारखंड के जल संकट का ये सारा ताना बना उत्तर प्रदेश में दशकों जारी विद्युत् संकट से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।प्रदूषण के अथाह भंडार पर बैठे रिहन्द बाँध की जलग्रहण क्षमता पिछले एक दशक में बहुत तेजी से घटी है।हर वर्ष मार्च का महीना शुरू होते ही रिहंद का जल स्तर तेजी से न्यूनतम बिंदु की ओर भागने लगता है ,ऐसे में रिहंद के पानी का उपयोग करने वाले लगभग 35 हजार मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों के सामने जबरदस्त उत्पादन संकट की स्थिति पैदा हो जाती है उस वक़्त एनटीपीसी और उत्तर प्रदेश उत्पादन निगम के बिजलीघर जल विद्युत् इकाइयों को बंद करने और पानी को नष्ट न करने की गुहार लगाने लगते हैं,यह वहीँ समय होता है जब बिहार और उत्तर प्रदेश में सोन नदी के किनारे स्थित तमाम जिलों में रबी की फसल के लिए पानी की जरुरत होती है ,मगर सोन नदी पर स्थित इन्द्रपूरी बैराज पानी के अभाव में दम तोड़ रहा होता है ।वहीँ समूचे बिहार को सिंचित करने वाला 125 साल पुराना सोन कैनाल सिस्टम किसानों ,ग्रामीणों को मुंह चिढ़ता नजर आता है। यहाँ ये भी जान लेना जरुरी है कि सोन नदी पर ही उत्तर प्रदेश में बनाये गए सोन पम्प कैनाल के माध्यम से सोनभद्र और मिर्जापुर जनपदों में सिंचाई का काम होता है।
अभिशापित सोन बेबस इंद्रपुरी बैराज
सोना उगाने वाली सोन अब अभिशापित हो चुकी है ,विकास की मौजूदा होड़ ने नदी के स्वरुप को छिन्न भिन्न करके ,नदी के जल पर निर्भर किसानों खेतिहरों के लिए मुश्किल की स्थिति पैदा कर दी है बिहार के भोजपुर ,अलवर ,जहानबाद ,पाटलिपुत्र आदि जनपदों में जल संकट की वर्तमान परिस्थितयों से रबी की फसल में भारी नुकसान की संभावनाएं हैं ,पूर्व में इन्द्रपुरी बेराज द्वारा पूर्वी और पश्चिमी सोन कैनाल के माध्यम से इन इलाकों में पानी छोड़ता रहा है लेकिन ये पानी पूरी तरह से अपर्याप्त साबित हुआ है।जल संसाधन विभाग बिहार के अधिकारियों का कहना है कि अगर उत्तर प्रदेश हमारे हिस्से का पानी हमें दे दे तो बिहार की आवश्यकता पूरी हो सकती है मगर उत्तर प्रदेश द्वारा समझौते का उल्लंघन किये जाने से हम आवश्यकता के सापेक्ष 30 से 40 फीसदी ही पानी इन्द्रपुरी बैराज के माध्यम से छोड़ पाते हैं | गौरतलब है कि सोन कैनाल प्रणाली द्वारा रोहतास,भभुआ,बक्सर ,भोजपुर,औरंगाबाद,गया ,जहानबाद ,पटना जिलों के लगभग 24 लाख एकड़ जमीन पर सिंचाई किये जाने का लक्ष्य रहता है,मगर ये लक्ष्य पिछले 3 दशकों में कभी पूरा नहीं हो पाया। वहीँ दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के जिन हिस्सों में सोन नदी के पानी से सिंचाई होती है वहां पर भी किसान बेबसी और लाचारी से जूझते रहते हैं ।सोन पम्प कैनाल भी गर्मी शुरू होते ही बंद हो जाता है हालात ये हैं कि किसी वक़्त देश में सर्वाधिक टमाटर पैदा करने वाला मिर्जापुर के इलाकों से ज्यादातर किसान एक बार पुनः वनोपजों की खेती की ओर लौटने लगे हैं।
अवैध बालू खनन है सोन का एक बड़ा संकट
सोन के सूखने की वजह सिर्फ उत्तर प्रदेश में ताप बिजलीघरों की रिहंद बाँध पर अतिनिर्भरता ,और रिहंद जलाशय का जल संकट ही नहीं है ,प्रदेश के सोनभद्र जनपद में बालू का अवैध खनन भी इस संकट की एक बड़ी वजह है।सत्ता समर्थित माफियाओं ने सोनभद्र में सोन नदी को बालू के खनन हेतु जगह जगह से बाँध दिया है ,कई जगहों पर तो वो पाइपों से होकर गुजरती है।,ऐसे में नदी के जलस्तर का कम होना स्वाभाविक है ,इसके अलावा सोन कैनाल प्रणाली की मरम्मत को लेकर भी बिहार की सरकार ने कभी गंभीर प्रयास नहीं किया ,नितीश कुमार द्वारा कैनाल के जीर्णोद्वार हेतु वादे तो बार बार किये गए ,लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया।जल आन्दोलन से जुड़े और बिहार के पत्रकार प्रभात शांडिल्य कहते हैं आप राज्य सरकार की गंभीरता का अंदाजा इस तथ्य से लगा सकते हैं कि १९६५ से में अस्तित्व में आये इन्द्रपुरी बैराज ने अपनी उम्र पूरी कर ली हैं ,लेकिन सरकार के पास नया बैराज बनाने का या फिर इन्द्रपुरी का अन्य कोई विकल्प तैयार करने का फ़िलहाल भी कार्यक्रम नहीं है।
जब तक है रिहंद तब तक संकट
जहाँ तक रिहंद समझौते का प्रश्न है जिसे हम बाणसागर अनुबंध भी कहते हैं बिहार को ,रिहंद जलाशय से कुल 50 लाख एकड़ फीट पानी दिया जाना था। उत्तर प्रदेश ,बिहार और मध्य प्रदेश के बीच हुए इस समझौते का अगर पालन किया जाता तो स्थिति पूरी तरह से भिन्न होती ।मगर अफ़सोस इस बात का है कि रिहंद बाँध के अस्तित्व में आने के बाद से ही पूरी तरह से भविष्यगत जल संकट की अनदेखी की गयी।एक तरफ रिहंद की तलहटी में जमे कचड़े ने बाँध को अधमरा कर दिया हालात यूँ हो गए कि बाँध की जलग्रहण क्षमता को कम करना पड़ा वहीँ दूसरी तरह सोन नदी में जमा गाद के ढेर से सोन का न्यूनतम जल बिंदु भी पांच से छः फीट बढ़ गया।ऐसे में स्वाभाविक जल प्रवाह पर तो असर पड़ ही रही सही कसर उत्तर प्रदेश में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी पार्क ने पूरी कर दी।अब जबकि बिहार सोन नदी पर बहुद्देशीय बाँध बनाने की बात कर रहा है ,आने वाले दिन दोनों ही राज्यों के लिए संबंधों को और भी तल्खी भरा कर सकते हैं |











