बिहार की महिला का धड़कता रहा दिल और रायपुर के डॉक्टरों ने कर दी सफल बायपास सर्जरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में बिहार के मधुबनी जिले की 48 वर्षीय महिला की सफल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) हुई है। मरीज के हृदय की तीनों प्रमुख नसों में गंभीर ब्लॉकेज (ट्रिपल वेसल डिजीज) था और हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 40 प्रतिशत रह गई थी।

विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने बीटिंग हार्ट तकनीक से सर्जरी की, जिसमें बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का उपयोग किया गया। आर्टेरियल ग्राफ्ट को लंबे समय तक प्रभावी माना जाता है। सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी (गोल्ड स्टैंडर्ड) तरीके से की गई। ऑपरेशन आयुष्मान योजना के अंतर्गत हुआ। मरीज के ब्लड शुगर का स्तर भर्ती के समय 500 mg/dL से अधिक था, जिसे पहले नियंत्रित किया गया। सर्जरी के दूसरे दिन से ही मरीज चलने-फिरने लगी और अब डिस्चार्ज हो रही है।

मरीज को डेढ़ महीने पहले सीने में दर्द हुआ था। मधुबनी में गलत निदान के बाद दरभंगा में एंजियोग्राफी से ब्लॉकेज पता चला। रिश्तेदार की सलाह पर परिवार रायपुर पहुंचा। बिहार के आयुष्मान कार्ड से छत्तीसगढ़ में इलाज संभव होने की पुष्टि के बाद सर्जरी हुई।

डॉ. साहू ने कहा कि अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के कारण महिलाओं में भी कम उम्र में हृदय रोग बढ़ रहा है। लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर और डीन डॉ. विवेक चौधरी के अनुसार, अब बिहार सहित पड़ोसी राज्यों के मरीज भी जटिल हृदय सर्जरी के लिए अम्बेडकर अस्पताल का रुख कर रहे हैं। इस सफल ऑपरेशन में डॉ. संकल्प दीवान, पीजी डॉ. लिपी गौतम और पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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