‘अवामी लीग से हटे प्रतिबंध, भारत के साथ बांग्लादेश ऐसे निभाए रिश्‍ते…’  तसलीमा नसरीन का दिल्‍ली से तारिक रहमान को सुझाव

February 14, 2026 2:16 PM
Taslima Nasreen on Bangladesh elections

नई दिल्‍ली। बांग्लादेश के संसदीय चुनावों के नतीजों पर निर्वासित लेखिका और कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने पहली प्रतिक्रया दी है। उन्‍होंने कहा है कि वह BNP की जीत से कहीं अधिक खुश जमात-ए-इस्लामी की हार को लेकर हैं।

नसरीन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जमात-ए-इस्लामी मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी है। क्योंकि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अवामी लीग का प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो बांग्लादेश में धर्म-आधारित राजनीति मजबूत हो सकती है।

तसलीमा नसरीन लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति और महिलाओं के अधिकारों पर मुखर रही हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “इस चुनाव में मैं इसलिए खुश नहीं हूं कि BNP जीता, बल्कि इसलिए कि इस्लामिस्ट-जिहादी-आतंकवादी समूह हार गया।” नसरीन ने पिछले डेढ़ साल में जमात-ए-इस्लामी की बढ़ती ताकत का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने हिंदुओं के घरों को जलाने, महिलाओं को गुलाम मानने और शरिया कानून लागू करने की कोशिशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने जमात को सत्ता में आने नहीं दिया, जो फिलहाल अच्छी खबर है।

नसरीन ने BNP सरकार से कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की अपील करते हुए सुझाव दिया कि 1 जुलाई चार्टर को रद्द किया जाए और संविधान में धर्मनिरपेक्षता बहाल की जाए। राज्य धर्म को हटाया जाए। धर्म-आधारित पारिवारिक कानूनों को समाप्त कर समान अधिकारों पर आधारित यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जाए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकार, अल्पसंख्यकों (हिंदू, बौद्ध, ईसाई, आदिवासी) की सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

नसरीन ने मांग की है कि बांग्लादेश में मदरसा शिक्षा समाप्त की जाए और धर्मनिरपेक्ष, विज्ञान-आधारित शिक्षा प्रणाली को मजबूत किया जाए। सभी के लिए सार्वभौमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित की जाए। लोकतंत्र के सम्मान में अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए। उसके नेताओं को निर्वासन से लौटने और राजनीति करने की अनुमति दी जाए। जमात-ए-इस्लामी को मुख्य विपक्ष बनाना सुरक्षित नहीं है।

आर्थिक विकास के साथ अमीर-गरीब की खाई कम की जाए। परिवारवाद और धर्म-आधारित राजनीति को प्रोत्साहन न दिया जाए। शेख हसीना के शासन में ब्लॉगर्स की हत्या हुई थी। फ्री थिंकर्स को सुरक्षित वापस लौटने और काम करने की व्यवस्था की जाए। अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन न किया जाए। प्रतिबंधित किताबें, थिएटर और फिल्में रिलीज की जाएं। सरकारी या निजी संस्थानों में महिलाओं के लिए हिजाब, बुर्का आदि अनिवार्य न किया जाए। सुरक्षा कारणों से बुर्का और निकाब पर प्रतिबंध लगाया जाए। जेल से रिहा किए गए जिहादी आतंकवादियों को दोबारा गिरफ्तार किया जाए।

तसलीमा नसरीन भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर कहा कि शत्रुतापूर्ण संबंध समाप्त कर राज्य और लोगों के हित में मित्रतापूर्ण संबंध स्थापित किए जाएं। चिन्मय कृष्णा दास को रिहा किया जाए। अवामी लीग के सदस्यों, कलाकारों, लेखकों और पत्रकारों को गलत तरीके से कैद से मुक्त किया जाए।

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