‘कुत्ता कब काटने के मूड में है, ये कोई नहीं पढ़ सकता’, ‘इंसानों के मामलों में भी इतनी याचिकाएं नहीं आतीं’ – सुप्रीम कोर्ट

January 7, 2026 1:18 PM
Supreme court on stray dogs

Supreme court on stray dogs : सुप्रीम कोर्ट में आज आवारा कुत्तों की समस्या से जुड़े मामले पर सुनवाई जारी है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन जजों की बेंच सभी पक्षों को विस्तार से सुन रही है। कोर्ट ने कहा कि कुत्ता प्रेमियों, काटने के पीड़ितों और इस समस्या से परेशान लोगों की बातें सुनकर ही कोई फैसला लिया जाएगा।

सुनवाई के दौरान बेंच ने गंभीर चिंता दिखाई। कोर्ट को बताया गया कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान में आवारा जानवरों की वजह से दो जजों के साथ सड़क हादसे हुए। एक जज को रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई और वे अभी ठीक नहीं हुए। कोर्ट ने कहा, “कुत्ता कब काटेगा, यह कोई नहीं बता सकता। सिर्फ काटना ही नहीं, सड़क पर दौड़ते कुत्ते भी हादसे करवा सकते हैं। रोकथाम इलाज से बेहतर है। सड़कें सुरक्षित रखनी होंगी।” बेंच ने सवाल उठाया कि स्कूल, अस्पताल या व्यस्त सड़कों पर कुत्तों की जरूरत क्या है? वे काटें या न काटें, खतरा तो रहता ही है।

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कुत्ता प्रेमियों की तरफ से कहा कि कुत्ते ज्यादातर कंपाउंड में रहते हैं, सड़कों पर नहीं। दुनिया में नसबंदी-टीकाकरण कर वापस छोड़ने का तरीका सफल है। कोर्ट ने पूछा, “आपकी जानकारी पुरानी तो नहीं? सच बोल रहे हैं न?” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इंसानों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गेटेड सोसाइटी में कुत्ते रखने का फैसला RWA वोट से हो। “हम जानवर प्रेमी हैं, लेकिन इंसान प्रेमी भी। कोई भैंस लाएगा तो क्या?” कई राज्य जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब पिछले आदेशों पर जवाब नहीं दे पाए हैं।

5 बार सुप्रीम कोर्ट कर चुका है सुनवाई

यह मामला 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किया था। वजह थी रेबीज के बढ़ते मामले।

अब तक की मुख्य सुनवाई:
11 अगस्त 2025: कुत्तों को शेल्टर में रखने का आदेश।
22 अगस्त 2025: नसबंदी के बाद वापस छोड़ने और फीडिंग जोन की अनुमति।
27 अक्टूबर 2025: राज्यों को फटकार।
3 नवंबर 2025: मुख्य सचिवों को तलब।
7 नवंबर 2025: सार्वजनिक जगहों से कुत्ते हटाने के सख्त निर्देश।

कल जस्टिस मेहता ने कहा था, ‘इंसानों के मामलों में भी इतनी याचिकाएं नहीं आतीं।’ देश में हर साल हजारों लोग कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं। कोर्ट दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। सुनवाई जारी है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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