नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व सेना कर्मी की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने ब्रेन स्ट्रोक के कारण विकलांगता पेंशन की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि यह बीमारी सैन्य सेवा से जुड़ी या उससे बढ़ी हुई नहीं थी, बल्कि यह उनकी लंबे समय से चली आ रही धूम्रपान की आदत के कारण हुई थी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के फैसले में कोई गलती नहीं पाई और अपील को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि पहली मेडिकल रिपोर्ट और मेडिकल बोर्ड की राय से कोई संदेह नहीं रहता कि ‘स्ट्रोक इस्केमिक RT MCA टेरिटरी’ नामक बीमारी सेवा के कारण नहीं हुई और न ही सेवा की वजह से बढ़ी। दोनों रिपोर्ट्स में स्पष्ट लिखा है कि याचिकाकर्ता को रोजाना 10 बीड़ी पीने की आदत थी।”
कोर्ट ने आगे कहा कि इस्केमिक स्ट्रोक आमतौर पर ब्लड क्लॉट या फैटी प्लाक से होता है और इसके प्रमुख रिस्क फैक्टर्स में हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा आदि शामिल हैं।
पेंशन नियमों का हवाला
बेंच ने ‘पेंशन रेगुलेशन फॉर द आर्मी, 1961’ के रेगुलेशन 173 और ‘गाइड टू मेडिकल ऑफिसर्स, 2002’ के पैराग्राफ 6 का जिक्र किया, जिसमें साफ कहा गया है कि शराब, तंबाकू या ड्रग्स के अत्यधिक इस्तेमाल, या यौन संचारित रोगों से होने वाली विकलांगता या मौत के लिए मुआवजा या पेंशन नहीं दिया जा सकता, क्योंकि ये व्यक्ति के अपने नियंत्रण में आने वाली बातें हैं।
इस फैसले से साफ है कि सेना में विकलांगता पेंशन तभी मिलेगी, जब बीमारी सैन्य सेवा से सीधे जुड़ी या उससे बढ़ी हुई साबित हो। व्यक्तिगत आदतों से जुड़ी समस्याओं पर पेंशन का दावा नहीं माना जाएगा।









