नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में कार्यकर्ता गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) को जमानत दे दी है कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के गौतम नवलखा को जमानत देने वाले आदेश पर लगा स्टे हटा दिया।
गौतम नवलखा मानवाधिकार कार्यकर्ता और पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (PUDR) के पूर्व सचिव हैं। इन्हें अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया गया था। 14 मई 2024 — सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी (NIA) की उस अपील पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर लगा स्टे हटा दिया, जिसमें हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले (2018) के आरोपी गौतम नवलखा को जमानत दी थी।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।कोर्ट गौतम नवलखा की हाउस अरेस्ट की शर्तों से संबंधित याचिका भी सुन रहा था।
गौतम नवलखा को शुरुआत में जेल में रखा गया था। उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में उनकी याचिका स्वीकार कर उन्हें हाउस अरेस्ट में भेज दिया। तब से वे नवी मुंबई में हाउस अरेस्ट में हैं।बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी थी, लेकिन NIA को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का मौका देने के लिए उस आदेश पर तीन हफ्ते का स्टे लगा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट का तर्क था कि ट्रायल पूरा होने में कई साल लगेंगे। इसलिए बिना विस्तार से दलीलों में जाए, कोर्ट ने स्टे बढ़ाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि गौतम नवलखा चार साल से ज्यादा समय से हिरासत में हैं, इसलिए अंतरिम स्टे बढ़ाने की जरूरत नहीं है।इस फैसले के साथ गौतम नवलखा को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत प्रभावी हो गई है।











