लेंस डेस्क। श्रीलंका की संसद ने एक ऐतिहासिक फैसले में सांसदों (एमपी) और उनकी विधवाओं को मिलने वाली पेंशन योजना को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय 17 फरवरी को लिया गया, जब 225 सदस्यीय संसद में बिल को बिना किसी संशोधन के पारित किया गया।
आश्चर्यजनक रूप से बिल के पक्ष में 154 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में केवल 2 वोट थे। शेष सदस्य वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहे। यह कदम राष्ट्रीय जनता शक्ति (एनपीपी) सरकार के प्रमुख चुनावी वादे का हिस्सा है, जो देश के आर्थिक संकट के बाद जनता की नाराजगी को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
न्यूज फर्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस बिल के पारित होने से पूर्व सांसदों और उनकी विधवाओं को मिल रही पेंशन पूरी तरह बंद हो जाएगी। वर्तमान में लगभग 550 पूर्व सांसद और उनके आश्रित इस पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। पहले की व्यवस्था के तहत, किसी सांसद को पेंशन पाने के लिए केवल पांच साल की सेवा पूरी करनी होती थी और यह पेंशन नॉन-कंट्रीब्यूटरी (बिना योगदान वाली) थी। अब इस कानून के लागू होने से सांसदों को कोई पेंशन नहीं मिलेगी, चाहे वे कितने भी साल सेवा करें।
आर्थिक संकट और चुनावी वादा
श्रीलंका 2022 से गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसके कारण जनता में राजनेताओं के विशेषाधिकारों के खिलाफ गुस्सा बढ़ा। एनपीपी सरकार जो मार्क्सवादी झुकाव वाली है, ने सितंबर 2024 के चुनावों में सत्ता में आने के बाद राजनेताओं के विशेषाधिकारों को कम करने का वादा किया था।
इस बिल को इसी साल 7 फरवरी को संसद में पेश किया गया था और 17 फरवरी को बहस के बाद पारित किया गया। द मॉर्निंग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने पूर्व राष्ट्रपतियों के विशेषाधिकारों को भी समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं, जो 2025 में ही शुरू हो चुके थे।
न्यूज फर्स्ट ने बताया कि यह फैसला सरकारी कर्मचारियों और राजनेताओं के बीच भेदभाव को समाप्त करता है। सरकारी कर्मचारी अपनी पेंशन के लिए योगदान देते हैं, जबकि सांसदों की पेंशन करदाताओं के पैसे से सीधे आती थी। इससे सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा, जो आर्थिक संकट के दौरान एक बड़ा मुद्दा रहा है। 2024 में ही पूर्व राष्ट्रपतियों और एक विधवा पर 98.5 मिलियन रुपए खर्च हुए थे।
प्रतिक्रिया में क्या कहा गया?
संसद में बहस के दौरान अधिकांश सदस्यों ने बिल का समर्थन किया। कुछ सदस्यों ने चिंता जताई कि पेंशन समाप्त होने से केवल अमीर या भ्रष्ट लोग राजनीति में आएंगे, क्योंकि कई सार्वजनिक सेवकों ने पेंशन छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया है।
पूर्व स्पीकर करु जयसूर्या ने कहा कि इससे राजनीति पर पूंजीपतियों का कब्जा हो सकता है। हालांकि, बहुमत ने इसे जनता की मांग के अनुरूप बताया।
विपक्ष में पड़े दो वोटों की पहचान नहीं की गई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह फैसला लगभग सर्वसम्मति से हुआ।
इस कानून से पूर्व सांसदों की पेंशन तुरंत बंद हो जाएगी, जो 49 साल पुराने कानून को रद्द करता है। श्रीलंका में जनता में इस फैसले का स्वागत हो रहा है, क्योंकि यह आर्थिक सुधारों का हिस्सा है। हालांकि, कुछ आलोचकों का मानना है कि इससे राजनीति में योग्य लोगों की कमी हो सकती है।
डेली मिरर ने एक ओपिनियन पीस में लिखा कि पेंशन को सावधानी से हैंडल करना चाहिए, क्योंकि यह राजनेताओं की वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा है। सरकार ने कहा है कि इससे बचाए गए फंड्स को विकास कार्यों में लगाया जाएगा।










